
नई दिल्ली। आज इंटरनेशनल मार्केट के साथ घरेलू बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा एक्शन देखने को मिल रहा है। पहले बात इंटरनेशनल मार्केट की करें तो अमरीकी तेल की कीमत 15 डॉलर से प्रति बैरल से नीचे आ गए हैं। जानकारों की मानें तो अमरीकी तेल के यह दाम 21 साल का निचला स्तर है। वहीं भारत में क्रूड ऑयल के दाम 1000 रुपए प्रति बैरल के आसपास पहुंच गए। अगर इसे लीटर के मायनों में देखें तो मौजूदा समय में देश में क्रूड ऑयल का दाम 6 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है। भारतीय वायदा बाजार में क्रूड ऑयल का कारोबार 33 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ है।
इंटरननेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल का भाव
आज अमरीकी क्रूड ऑयल की कीमत 15 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गए हैं। मौजूदा समय में अमरीकी क्रूड के दाम करीब 20 फीसदी की गिरावट के साथ 14.65 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं। जानकारों की मानें तो अमरीकी ऑयल 21 साल के निचले स्तर पर आ गए हैं। आंकड़ों की मानें तो बीते एक साल में अमरीकी क्रूड ऑयल की कीमत में 77 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। वहीं ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत के बारे में बात करें तो करीब 5 फीसदी की गिरावट के साथ 27 डॉलर के आसापास कारोबार कर रहा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम में भी लगातार गिरावट देखने को मिल रही है।
भारतीय बाजारों में 25 फीसदी की गिरावट
वहीं भारतीय वायदा बाजार की बात करें क्रूड ऑयल के दाम में भारी गिरावट के साथ बंद हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार क्रूड ऑयल के दाम 33 फीसदी की गिरावट के साथ 963 रुपए प्रति बैरल पर पहुंच पर बंद हुआ है। जो कि अब तक का सबसे निचला स्तर है। अगर इसे लीटर के हिसाब से देखें तो क्रूड ऑयल का भाव 6 रुपए प्रति लीटर के स्तर पर आ चुका है। आपको बता दें कि एक बैरल में 159 लीटर होता है।
कोरोना बना क्रूड ऑयल का दुश्मन
कोरोना वायरस की वजह से पूरी दुनिया में लॉकडाउन की स्थिति है। जिसकी वजह से पूरी दुनिया में डिमांड की काफी कमी देखने को मिल रही है। वहीं सप्लाई डिमांड के मुकाबले में काफी ज्यादा है। जिसकी वजह से क्रूड ऑयल की कीमत में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि भारत में पहली बार है जब क्रूड ऑयल के भाव 963 रुपए से नीचे आए हैं। उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया इन कीमतों का फायदा तब ही देखने को मिलेगा जब रुपए डॉलर के मुकाबले बेहतर होगा। मौजूदा समय में रुपया डॉलर के मुकाबले 76 रुपए से ज्यादा के निचले स्तर पर बना हुआ है।