बिजली के निजीकरण के विरोध में मथुरा समेत प्रदेश भर में राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन व अभियंता संघ के पदाधिकारियों का धरना।
मथुरा। उत्तर प्रदेश के पांच शहरों मेरठ, लखनऊ, मुरादाबाद, वाराणसी और गोरखपुर में विद्युत व्यवस्था का निजीकरण किये जाने के सरकार के फैसले का ऊर्जामंत्री श्रीकांत शर्मा के क्षेत्र मथुरा में भी विरोध हुआ। कैबिनेट द्वारा लिए गए निर्णय के विरोध में मंगलवार को राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन और अभियंता संघ के पदाधिकारियों ने मथुरा समेत पूरे प्रदेश में धरना दिया।
सरकार के खिलाफ प्रदर्शन
अधीक्षक अभियंता विनोद कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पांच शहरों में बिजली का निजीकरण किया जा रहा है। उसके विरोध में धरना प्रदर्शन किया जा रहा है और कार्य बहिष्कार किया गया है। हमारी मांगे हैं कि सरकार बिजली के निजीकरण के फैसले को तत्काल वापस ले। उन्होंने बताया कि जैसा कि पूर्व में सरकार ने आगरा के फ्रेंचाइजीकरण का फैसला लिया था, रिपोर्ट के मुताबिक उसमें साढ़े चार सौ करोड़ का घाटा हो चुका है। उनका कहना है कि विद्युत विभाग के कर्मचारी, अधिकारी यहां तक कि संविदा कर्मी भी ये नहीं चाहते हैं कि सरकार बिजली का निजीकरण करे। इससे सरकार को घाटा होगा और बिजली विभाग पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।
विनोद कुमार का कहना है कि हमारी मांगें वाजिब हैं और इस मामले में हमारी हमारी संघर्ष समिति जो ओपन डिबेट करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि हमारे जितने शहर हैं, वहां से हम छह रुपए यूनिट के हिसाब से कमा रहे हैंं। जहां से हमें पैसा ज्यादा मिलता है, उसी पैसे से हम बिजली विभाग को चला रहे हैं, गांव का विकास कर रहे हैं, लोगों को ट्यूबवेल का कनेक्शन दे रहे हैं। जहां से हमें पैसा मिलता है, सरकार उसी क्षेत्र का निजीकरण कर रही है। हम अगर अपने कमाउ पुत्र को दे देंगे तो विभाग कंगाल हो जाएगा। सबकी सरकारी नौकरियां चली जाएंगी। उन्होंने कहा कि अगर सरकार अब भी हमारी नहीं सुनती है तो चाहे हड़ताल करनी पड़े या जेल जाना पड़े, हम सबके लिए तैयार हैं।