मथुरा

जानिये कौन हैं SC ST Act की लड़ाई लड़ने वाले देवकी नंदन ठाकुर

SC ST Act पर भाजपा सरकार की मुश्किलें बढ़ाने वाले देवकी नंदन ठाकुर भागवताचार्य हैं इतनी जानकारी तो बहुत से लोगों को है, लेकिन....
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Updated: 10 Sep 2018, 7:17 PM IST
SC ST Act
SC ST Act

मथुरा। SC ST Act पर भाजपा सरकार की मुश्किलें बढ़ाने वाले देवकी नंदन ठाकुर भागवताचार्य हैं इतनी जानकारी तो बहुत से लोगों को है, लेकिन इससे ज्यादा बहुत कम लोगों को उनके बारे में पता है। तो चलिये हम बताते हैं कि देवकी नंदन ठाकुर कौन हैं, जो 22 गांव के ठाकुरों की महापंचायत आगरा में करने की प्लानिंग कर रहे हैं।


ब्राह्मण परिवार में लिया जन्म
उत्तर प्रदेश के मथुरा में स्थित गांव ओहावा में देवकीनंदन ठाकुर का जन्म 12 सितंबर को 1978 को ब्राह्मण परिवार में राजवीर शर्मा के यहां हुआ था। उनके पिता और मां दोनों धार्मिक थे। छह साल की उम्र से ही उन्होंने अपने घर को छोड़ दिया और श्रीधाम वृंदावन में रहने लगे, जहां उन्होंने बृज के प्रसिद्ध रसाली संस्थान में भाग लिया और भगवान कृष्ण और भगवान राम के रूप का प्रदर्शन किया। श्री धाम वृंदावन में उन्होंने अपने आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु अनंत श्री विभुतीत भागवत आचार्य पुरुषोत्तम शरण शास्त्रीजी से मुलाकात की। बाद में उन्हें निंबार्क संप्रदाय के अनुयायी के रूप में गुरु-शिष्य परंपरा के तहत अपनी आध्यात्मिक शिक्षा दीक्षा मिली।


13 वर्ष की आयु में सीखा महापुराण
देवकीनन्दन ठाकुर को आध्यात्मिक और साथ ही वैदिक ज्ञान प्राप्त है। जब वे सिर्फ 13 वर्ष के थे, तो उन्होंने अपने सद्गुरु के आशीर्वाद और मार्गदर्शन के साथ पूरे श्रीमद् भागवत महापुराण को सिख लिया था। जब तक वह हर दिन महापुराण की छंदों की निर्धारित संख्या का पाठ नहीं करते, तब तक अपना भोजन नहीं करते थे। इस तरह कुछ महीनों के भीतर उन्होंने पूरे श्रीमद् भागवत महापुराण को याद किया और हर रोज इसे पूर्ण भक्ति के साथ समझा। 18 वर्ष की आयु में देवकीनन्दन ठाकुर ने शाहदरा के श्रीराम मंदिर में श्रीमद भागवत महापुराण की शिक्षाओं का जिक्र किया और प्रचार किया। जिन लोगों ने भाग लिया, वे उनकी दिव्य आवाज़ से और अनूठे तरीके से श्री देवकीनन्दन ठाकुर के भक्त हो गए।


विश्व शांति के लिए संगठन की स्थापना
देवकी नंदन ठाकुर ने विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट का अर्थ है "विश्वव्यापी शांति।" ट्रस्ट का उद्देश्य सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से क्षेत्र की हवा में खुशी को बनाए रखना है। यह गरीब, विकलांग और बुज़ुर्ग नागरिकों की सहायता करता है। आश्रम गतिविधियों में संस्कृत, छात्र विकास, गौशाला, वृद्धा आश्रम, अनाथ बच्चों की सेवा आदि शामिल हैं और सभी समुदायों में शांति बना कर रखना है।

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