वृंदावन में एक छोटी सी लापरवाही ने 10 जिंदगियां छीन लीं। नाव में बैठे लोगों को उसकी रफ्तार और चलने का अंदाज देखकर पहले से ही डर लग रहा था। लेकिन चालक ने नहीं सुनी। आखिर कैसे हुआ ये दर्दनाक हादसा? पढ़ें पूरी कहानी।
मथुरा के वृंदावन में शुक्रवार दोपहर यमुना किनारे एक ऐसा हादसा हुआ। जिसने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। श्रद्धा और आस्था के साथ दर्शन करने आए लोग कुछ ही पलों में मौत के मंजर में फंस गए। लापरवाही, तेज रफ्तार और अव्यवस्था ने मिलकर 10 जिंदगियां लील लीं। अब सवाल उठ रहा है कि अगर समय रहते सावधानी बरती जाती, तो क्या ये जानें बच सकती थीं?
वृंदावन के केसी घाट पर शुक्रवार दोपहर एक दर्दनाक हादसा हो गया। यमुना नदी में श्रद्धालुओं से भरी एक मोटरबोट पलट गई। जिसमें छह महिलाओं समेत 10 लोगों की मौत हो गई। ये सभी श्रद्धालु पंजाब के लुधियाना, हिसार और मुक्तसर जैसे जिलों से भगवान के दर्शन करने आए थे। सुबह उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना की थी। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि दोपहर उनकी जिंदगी का आखिरी समय बन जाएगा।
जानकारी के मुताबिक, करीब 37 श्रद्धालु दो मोटरबोट में सवार होकर यमुना की सैर पर निकले थे। जिस नाव में हादसा हुआ। उसमें सभी लोग एक साथ बैठे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब नाव तेज गति से आगे बढ़ने लगी तो कुछ यात्रियों को डर महसूस हुआ। उन्होंने चालक से कई बार गति कम करने और सावधानी बरतने को कहा, लेकिन उसने इसे रोज का काम बताते हुए उनकी बातों को नजरअंदाज कर दिया। इसी दौरान नदी किनारे पांटून पुल को हटाने का काम चल रहा था। हैरानी की बात यह रही कि वहां किसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई थी। न तो क्षेत्र को रोका गया था और न ही किसी को चेतावनी दी गई थी। जब मोटरबोट उस इलाके के पास पहुंची। जहां पानी भी कम था। तो वह अचानक रुकने लगी। चालक ने बोट को आगे बढ़ाने के लिए रफ्तार और बढ़ा दी।
तेज गति और असंतुलन के कारण मोटरबोट पांटून पुल से टकरा गई। टक्कर के बाद नाव में बैठे लोग घबराकर एक तरफ झुक गए। जिससे संतुलन बिगड़ गया और बोट पलट गई। देखते ही देखते लोग यमुना के पानी में डूबने लगे। चीख-पुकार मच गई। लेकिन मदद पहुंचने में देर हो चुकी थी।
हादसे के बाद स्थानीय गोताखोर, पुलिस और पीएसी की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। 22 लोगों को किसी तरह सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। जिनमें से कुछ घायल थे। और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं, कई लोग देर रात तक लापता रहे। जिनकी तलाश के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने ड्रोन की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाया।
इस हादसे ने प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि पुल हटाने वाली टीम के खिलाफ मामला दर्ज करने की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताया है। वहीं, मृतकों के परिवारों में मातम पसरा है। जहां लोग अब भी अपने अपनों के लौटने का इंतजार कर रहे है।