मथुरा

प्रेमानंद महाराज को 14 दिन बाद देख छलके भक्तों के आंसू, विरोध करने वालों ने भी किया पदयात्रा का स्वागत

Premanand Maharaj: मथुरा के फेमस संत प्रेमानन्द महाराज की रात में निकलने वाली पैदल यात्रा दोबारा शुरू हो गई है। सोमवार सुबह पदयात्रा मार्ग पर रहने वाले लोग उनसे मिले और पुनः यात्रा शुरू करने का निवेदन किया। इस पर प्रेमानन्द महाराज ने रात दो बजे निवास स्थान से निकलकर पैदल यात्रा शुरू करने की घोषणा कर दी।

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Feb 18, 2025

Premanand maharaj Padyatra Starat: श्री कृष्ण शरणम् स्थित निवास स्थान से रात दो बजे राधा केली कुंज जाने वाले प्रेमानन्द महाराज ने एनआरआई ग्रीन सोसाइटी के निवासियों के विरोध की वजह से पदयात्रा रोक दी थी। बाद में मार्ग बदलकर कार से रमणरेती पुलिस चौकी होकर जाने लगे।

सोसाइटी के अध्यक्ष ने मांगी थी माफी

रविवार को एनआरआई ग्रीन सोसाइटी के अध्यक्ष आशू शर्मा ने प्रेमानंद महाराज से मुलाकात कर माफी मांगी और दोबारा इसी मार्ग से यात्रा शुरू करने की अपील की। सोमवार को भी यात्रा मार्ग पर रहने वाले लोग संत से मिले और यात्रा को दोबारा शुरू करने की प्रार्थना की। इसके बाद प्रेमानन्द महाराज ने लोगों को आश्वास्त किया और कहा कि सोमवार की रात ठीक दो बजे वह निवास स्थान से निकलेंगे और हॉस्पिटल के बराबर होते हुए आश्रम तक पैदल जाएंगे।

रात्रि 2 बजे प्रेमानंद महाराज निकले तो भक्त हुए उत्साहित

प्रेमानंद महाराज 14 दिन बाद सोमवार रात 2 बजे एक बार फिर जैसे ही श्री कृष्ण शरणम् सोसाइटी से बाहर पदयात्रा करने निकले तो भक्त उत्साहित हो गए। उन्होंने रंगोली बनाकर बाबा का स्वागत किया। साथ ही जोर-जोर से राधा रानी की जय जयकार लगाई। इस दौरान कई भक्त इमोशनल भी दिखे।

पदयात्रा शुरू दुकानदार खुश

प्रेमानंद महाराज ने पदयात्रा शुरू होने से दुकानदारों में भी खुशी की लहर दिखी। दुकानदारों ने बताया कि पदयात्रा स्थगित होने से दुकानदारी बंद हो गई थी। यात्रा दोबारा शुरू होने से अब उनका रोजगार भी चलने लगेगा।

विरोध करने वाले NRI ग्रीन सोसाइटी लोगों ने भी किया स्वागत

संत प्रेमानंद महाराज पदयात्रा करते हुए जब NRI ग्रीन सोसाइटी के बाहर पहुंचे तो वहां भी भक्तों ने उनका जोरदार स्वागत किया। सोसाइटी के लोगों ने उनके स्वागत में रंगोली बनाई। राधा नाम के जयकारे लगाए। यह वही सोसाइटी है, जिसके लोगों ने महाराज की रात्रि कालीन पदयात्रा के दौरान बजने वाले ढोल और आतिशबाजी का विरोध किया था।

Updated on:
18 Feb 2025 08:16 am
Published on:
18 Feb 2025 08:04 am
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