
मोहन भागवत फोटो सोर्स RSS X Account
वृंदावन स्थित सुदामा कुटी आश्रम के शताब्दी महोत्सव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने सनातन धर्म, सामाजिक एकता, भक्ति और आत्मसाधना पर विस्तार से विचार रखे।
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे सनातन परंपरा से जुड़े लोग एकजुट होते जाएंगे। वैसे-वैसे समाज को तोड़ने वाली ताकतें कमजोर होती चली जाएंगी। उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों में यह साफ दिखा है कि हिंदू समाज की एकता बढ़ने के साथ विभाजन फैलाने वाले तत्व बिखरते गए हैं।
मोहन भागवत ने कहा कि जो शक्तियां आज सामने दिखाई देती हैं। वे अंदर से कमजोर हो चुकी हैं। दुनिया भर में संघर्ष कर रही हैं। वे हमारा कुछ नुकसान नहीं कर सकतीं। लेकिन समस्या यह है कि जिस तरह की तैयारी हमें करनी चाहिए थी। वह पूरी तरह नहीं हो पाई है। इसी कारण कई बार वे हमारे सामने सक्रिय दिखती हैं। उन्होंने समाज से अपील की कि जैसे हम रोज अपने और अपने परिवार के लिए प्रयास करते हैं। वैसे ही समाज के लिए भी नियमित रूप से कुछ करना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान सरसंघचालक ने सुदामा दास जी महाराज के जीवन और नाभा पीठ के इतिहास पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि भारत ने करीब 500 वर्षों तक मुगलों के शासन को झेला। लेकिन यदि देश और धर्म को समाप्त होना होता। तो उसी समय हो गया होता। कठिन परिस्थितियों के बावजूद समाज ने अपने मूल्यों और आस्था को बचाए रखा। यह शक्ति कहां से आई इसका उत्तर भक्ति में है।
भागवत ने कहा कि पर्यावरण और मनुष्य अलग नहीं हैं। हम सृष्टि के स्वामी नहीं, बल्कि उसका हिस्सा हैं। हमारे पूर्वजों ने यही सत्य सिखाया है। उन्होंने बताया कि ज्ञान और कर्म का सही परिणाम तभी मिलता है। जब व्यक्ति अपने जीवन में शांति और आनंद के साथ दूसरों के जीवन में भी सुख पहुंचाने का प्रयास करे।
उन्होंने आत्मसाधना पर जोर देते हुए कहा कि बाहरी रूप और परिस्थितियां बदलती रहती हैं। लेकिन भीतर की एकता सदा बनी रहती है। एकांत में स्वयं को पहचानना और अपने अंदर मौजूद चैतन्य को समझना जरूरी है। उसी भावना के साथ समाज सेवा और परोपकार करना जीवन का लक्ष्य होना चाहिए।
शताब्दी महोत्सव के अवसर पर शनिवार सुबह सुदामा कुटी आश्रम से भव्य शोभायात्रा भी निकाली गई। महंत सुतीक्ष्ण दास महाराज रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले। शोभायात्रा विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए दोपहर बाद आश्रम लौटकर संपन्न हुई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और संतजन उपस्थित रहे।
Updated on:
10 Jan 2026 08:21 pm
Published on:
10 Jan 2026 08:20 pm
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