महाविद्या माता को भगवान श्रीकृष्ण की कुलदेवी कहा जाता है।
मथुरा। भगवान श्री कृष्ण ने ने ब्रज में अनेकों लीलाएं की और उन्हीं लीलाओं में से एक है महाविद्या लीला। कहा जाता है कि मामा कंस का वध करने से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने महाविद्या माता की परिक्रमा कर उनका आशीर्वाद लिया था। वध करने के बाद कान्हा ने महाविद्या कुंड में स्नान किया था। महाविद्या मंदिर थाना गोविंद नगर क्षेत्र के महाविद्या कॉलोनी में बना हुआ है। महाविद्या माता का यह मंदिर काफी प्राचीन है। यहां अक्षय नवमी के दिन मंदिर के साथ-साथ मथुरा की भी परिक्रमा की जाती है। पत्रिका के विशेष कार्यक्रम Once Upon A Time में आज हम बताएंगे इस महाविद्या मंदिर की मान्यताओं के बारे में।
यह है मान्यता
प्राचीन महाविद्या मंदिर के इतिहास के बारे में जानकारी देते हुए मंदिर के सेवारत पुजारी प्रकाश नाथ चतुर्वेदी ने बताया कि महाविद्या माता को भगवान श्रीकृष्ण की कुलदेवी कहा जाता है। कंस के वध से पहले भगवान कृष्ण ने अपनी कुलदेवी की पूजा कर परिक्रमा की थी और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया था। जिस दिन कृष्ण ने माता से आशीर्वाद लिया, उस दिन कार्तिक सुधि नवमी का दिन था जिसे अक्षय नवमी के नाम से भी जाना जाता है। कार्तिक सुधि दशमी को भगवान ने कंस का संहार किया। तब से हर साल अक्षय नवमी यानी कार्तिक सुधि नवमी के दिन मंदिर व मथुरा की परिक्रमा का चलन शुरू हुआ।