
मथुरा। मांट थाने में तैनात एक ट्रेनी एसआई ने पुलिस की नौकरी से इस्तीफ़ा से दिया। इस्तीफे के साथ दरोगा ने एक विभाग का शिकायती पत्र भी संलग्न किया है। उस पत्र में एस आई ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, साथ ही भ्रष्टाचार की भी बात लिखी है।
इस्तीफा पत्र में ये लिखा
मथुरा के मांट थाने पर तैनात एसआई अश्वनी कुमार ने एसएसपी मथुरा को भेजे इस्तीफ़ा पत्र में विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों के अमानवीय व्यवहार पर आपत्ति उठाई है। 2015 बैच के एसआई अश्वनी कुमार ने पत्र में लिखा है कि विभाग में 30 सीएल ( कैजुअल लीव) मिलती हैं, लेकिन वास्तिवकता इससे बिलकुल भिन्न है। अगर 30 दिन नहीं दिए जा सकते तो उनको कम कर दिया जाए। परन्तु जितनी हैं वो दी जाएं और उन्हें प्रदान करने की प्रक्रिया सरल व व्यवहारिक बनाई जाए। इसके साथ ही उन्होंने लिखा है कि अगर कोई उपनिरीक्षक तत्काल रूप जाना चाहे तो वह आधिकारिक रूप से नहीं जा सकता जो कि बेहद अमानवीय व अव्यवहारिक है।
पुलिसवालों की भी होती हैं पारिवारिक जिम्मेदारियां
एसआई अश्वनी कुमार ने लिखा है मुझे नहीं लगता कि कोई व्यक्ति मात्र काम करने या देश सेवा के लिए पुलिस में भर्ती होता है। सबकी अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियां भी होती हैं। 24 घंटे की जिम्मेदारी निर्धारित करना अनुचित है। इसकी वजह से सामान्य स्थिति में भी तनाव बना रहता है। उप निरीक्षक की भी शिफ्ट वाइज जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
सरकारी काम के लिए भी देनी पड़ती है रिश्वत
ट्रेनी एसआई ने लिखा हमारे विभाग के अंदर काफी भ्रष्टाचार है। सरकारी कार्यों के लिए भी रिश्वत देनी पड़ती है तो कैसे कोई अपने सिद्धांतों पर चल सकता है या ईमानदार रह सकता है। जो कमाकर नहीं देता वो इधर उधर लॉ एंड आॅर्डर के धक्के खाता है। उदाहरण के तौर पर टीए, डीए के लिए 10 प्रतिशत एडवांस, मेडिकल के लिए दस प्रतिशत, केस डायरी के लिए सौ रूपये, चालान बुक के लिए सौ रूपए लिए जाते हैं। ऐसे बहुत सारे उदाहरण हैं।
पैसे लेकर दबायी जाती हैं लूट की घटनाएं
लूट की घटनाएं चोरी व मारपीट में बदली जाती हैं या पैसे लेकर दबायीं जाती हैं। ट्रेनी दरोगा ने लिखा इन खामियों को दूर करने के लिए इन कमियों को स्वीकार करना जरूरी है। दरोगा का पत्र सामने आने के बाद पुलिस के आलाअधिकारी इस मामले में जांच करने की बात कह रहे हैं।