
आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार- Photo ANI
Indresh Kumar on Rahul Gandhi: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के खिलाफ दिए गए बयानों पर आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने राहुल गांधी पर संतुलनहीन और नफरत भरे बयान देने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे बयान देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण हैं। इंद्रेश कुमार वृंदावन में हैं और उन्होंने भगवान से राहुल गांधी, उनकी पार्टी तथा समर्थकों को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की।
इंद्रेश कुमार ने कहा कि राहुल गांधी कभी-कभी असंतुलित और नफरत से भरे बयान देते हैं। मैं फिलहाल वृंदावन में हूं और वृंदावन के स्वामी से प्रार्थना करूंगा कि राहुल गांधी, उनकी पार्टी और उनके समर्थकों को सद्बुद्धि मिले। उन्होंने लगातार आरएसएस के खिलाफ टिप्पणियां की हैं। आरएसएस एक देशभक्ति, सामाजिक सेवा और 'राष्ट्र प्रथम, राष्ट्र अंतिम' के सिद्धांत पर चलने वाला संगठन है। उनका यह व्यवहार उनके शोभायमान नहीं है। उन्हें यह अनुचित आचरण बंद करना चाहिए।
आरएसएस नेता ने आगे कहा कि अगर राहुल गांधी इस बात को समझते हैं और उसी के अनुसार अपना व्यवहार रखते हैं तो यह उनके लिए और देश के लिए अच्छा रास्ता होगा। अन्यथा यह द्वेष की राजनीति है, जिसमें आलोचना का खेल चल रहा है, जो देश के लिए बेहद दुखद है। इंद्रेश कुमार ने कांग्रेस और उनके सहयोगी दलों के नेताओं से अपील की कि वे सकारात्मक राजनीति करें और नकारात्मक राजनीति को त्याग दें।
आरएसएस नेता ने स्पष्ट किया कि संघ सदैव राष्ट्र सेवा में लगा रहता है। आपदा राहत, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वदेशी और सामाजिक समरसता जैसे क्षेत्रों में संघ की भूमिका निर्विवाद रही है। ऐसे संगठन के खिलाफ बार-बार बयानबाजी करना लोकतंत्र और सकारात्मक राजनीति की भावना के विरुद्ध है।
इसी मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी लोकसभा में राहुल गांधी के बयान का जवाब देते हुए आरएसएस की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) एक सामाजिक और सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है। शिक्षा मंत्रालय नियमों के अनुसार चलता है। शिक्षा विभाग की अपनी पूरी व्यवस्था है। अधिकारी सभी प्रणालियों की निगरानी करते हैं और हमारी सरकार देश में अच्छी व्यवस्थाएं स्थापित करने में लगी हुई है।
गोयल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके शासनकाल में राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) और सोनिया गांधी जैसे अतिरिक्त संवैधानिक प्राधिकार सरकार चला रहे थे, जबकि वर्तमान सरकार पारदर्शी और नियम-आधारित शासन पर जोर दे रही है।
यह विवाद हाल ही में लोकसभा में आरएसएस से जुड़े एक मुद्दे पर हुई बहस के दौरान उछला है। विपक्षी दलों ने आरएसएस पर विभिन्न आरोप लगाए थे, जिसका भाजपा और संघ परिवार के नेताओं ने कड़ा विरोध किया।
Updated on:
30 Jul 2026 06:40 pm
Published on:
30 Jul 2026 06:40 pm
