मऊ शाही कटरा मस्जिद के मैदान में ऐतिहासिक भरत मिलाप हुआ. आजान और जय श्री राम के उद्घोष के बीच हजारों की भीड़ के में भरत मिलाप का मंचन हुआ. कहा जाता है कि मुगल काल से यह ऐतिहासिक भरत मिलाप का कार्यक्रम यहां आयोजित होता है. जिसे बेगम जंहाआरा इसी मस्जिद में बैठकर देखा करती थीं.
Mau Bharat Milap: गंगा जमुनी तहजीब के आधार पर मुगल काल के चली आ रहा यूपी के मऊ शहर का ऐतिहासिक भरत मिलाप गुरुवार की सुबह संपन्न हुआ। तड़के साढ़े चार बजे पुष्पक विमान शाही कटरा मस्जिद के दक्षिणी तरफ पहुंचा। इस दौरान वन से लौटे प्रभु श्री राम का रथ पुराने जमाने से चली आ रही परंपरा के तहत शाही कटरा मस्जिद के द्वार को तीन बार छू कर आगे बढ़ गया।
शाही कटरा के मैदान में भरत मिलाप का सजीव मंचन देखने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ी। इस बार वर्ष गत वर्षों की तुलना में ज्यादा भीड़ नजर आई। कार्यक्रम स्थल पर तिल रखने तक की जगह नहीं बची। चारो भाइयों के गले लगते ही लोगों के आंखों से आंसू छलक उठे। जय श्री राम और हर-हर महादेव के नारे के बीच चारो भाइयों की आरती और पुष्पवर्षा की गई। चारों भाइयों के गले लगते देख लोग उत्साहित तो थे ही साथ ही कलाकारों के सजीव मंचन को देख लोगों के आंखों से आंसू छलक गए।
सुरक्षा के रहे विशेष इंतेजामत, पूरी रात जगे डीएम और एसपी
मऊ भारत मिलाप के आयोजन को लेकर के प्रशासन सक्रिय रहता है। क्योंकि 2005 में इसी भरत मिलाप आयोजन के दौरान उपद्रवी तत्वों के द्वारा कुछ व्यवधान डाला गया जिसके बाद मऊ में भीषण साम्प्रदायिक दंगा हुआ। इसी को देखते हुए जिला प्रशासन खास सक्रिय रहा है। जहां मस्जिद के किनारे विशेष सुरक्षा के इंतजाम दिखा तो वहीं पूरी रात डीएम और एसपी शाही कटरा के मैदान में मौजूद रहते हैं। ताकि किसी भी प्रकार की कोई सुरक्षा में चूक ना हो। पुलिस कर्मियों की मौजूदगी में राम के विमान को मस्जिद के गेट से तीन बार टकराया जाता है।
मुगल काल से शाही कटरा में होता है भरत मिलाप का आयोजन
मऊ जनपद की रामलीला अपने आप में एक अनोखी परंपरा है क्योंकि यहां पर रामलीला का मंचन एक स्थान से नहीं बल्कि नगर के कई प्रमुख स्थानों पर आयोजित होता है, उसी में एक कड़ी भारत मिलाप का है जिसका आयोजन शाही कतरे के मैदान में होता है। मुगल काल में औरंगजेब की बहन जहांआरा के द्वारा भारत मिलाप का आयोजन बड़े ही भव्य तरीके से शाही कटरा मैदान में आयोजित किया जाता था। शाही मस्जिद जहांआरा का निवास स्थान था। यहीं वह महल छज्जे से पूरी भरत मिलाप देखती थी। वही परंपरा आज भी बड़े ही धूमधाम से और पारंपरिक गीतों के माध्यम से होता है। जब शाही मस्जिद से सुबह अजान की आवाज आती है उसी दरमियान हरहर महादेव और जय श्रीराम के नारे और नारदी गायन के साथ भारत मिलाप का आयोजन भी होता है।
मऊ से अभिषेक सिंह की रिपोर्ट