
मऊ. केरल में सन 1941 में जन्मी डॉ॰ जूड ने 1968 में एमबीबीएस की शिक्षा पूरी कर समाज और गरीब महिलाओं की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। डॉ॰ जूड ने 1977 में 15 बेड और तीन डॉक्टरों के भरोसे मऊ जिले में फातिमा अस्पताल की नींव रखी थी और अब वर्तमान में फातिमा अस्पताल में 250 बेड हैं जहां गरीब महिलाओं का निःशुल्क इलाज किया जाता है। अब तक इन्होंने निरंतर गरीबों की सेवा करते हुए 50,000 (पुराना आकड़ा) सर्जरी का रिकॉर्ड बनाया है। डॉ जूड अपने पूरी दिनचर्या में 24 घंटे में 12 से 16 घंटे केवल हॉस्पिटल में मरीजों की देखभाल करते हुए गुजार देती हैं। वह एक दिन में 250 से 300 मरीजों को देखती हैं और वह न कभी थकती हैं और न ही कभी रुकती है। हालांकि अब वह फातिमा हॉस्पिटल से वर्षों पहले रिटायर भी हो चुकी हैं, लेकिन आज भी वह अपने सहयोगियों के माध्यम से ओपीडी में अन्य डॉक्टर की मदद करने से नहीं चुकती। कभी-कभी क्रिटिकल सर्जरी अपने देखरेख में खड़े होकर अपने समक्ष डॉक्टरों को निर्देशन देने का कार्य करती हैं। डॉ॰ जूड अपने इन्हीं कर्मठ सेवा के कारण मऊ में काफी लोकप्रिय हैं। इनके बारे में जिले का प्रत्येक नागरिक जानता है। डॉ॰ जूड ने अपने जीवन के बहुमूल्य समय को केवल निःस्वार्थ भाव सेवा में ही लगा दिया। उनके इस योगदान को देखते हुए उद्योगपति टीना अंबानी द्वारा सिल्वर फाउंडेशन के लिए हार्मनी द्वारा दिया गया प्रतिष्ठित "हार्मनी सिल्वर अवार्ड्स" 2009 में सम्मानित किया गया। डॉ॰ जूड 2009 से लेकर अब तक दर्जन भर अवार्ड से सम्मानित हो चुकी हैं। वर्तमान में जिले के बहुत से डॉक्टरों के लिए डॉ॰ जूड उनके लिए प्रेरणा का श्रोत बनी हुईं हैं
By Vijay Mishra