जमा मस्जिद शाही कटरा से प्रभु श्री राम के तीन बार विमान के टकराने के साथ ही प्रभु श्रीराम और भईया भरत का ऐतिहासिक मिलन संपन्न हो गया। इसके साथ ही प्रशासन ने राहत की सांस ली।
Ramlila: जमा मस्जिद शाही कटरा से प्रभु श्री राम के तीन बार विमान के टकराने के साथ ही प्रभु श्रीराम और भईया भरत का ऐतिहासिक मिलन संपन्न हो गया। इसके साथ ही प्रशासन ने राहत की सांस ली। अति संवेदन शील मऊ का भरत मिलाप सूर्य की रश्मियों के प्रस्फुटित होने के साथ ही 14 वर्ष से बिछड़े भाइयों के मिलन के साथ ही खत्म हुआ। रावण वध के बाद जैसे जैसे शीतला मंदिर से भगवान राम का रथ भईया भरत से मिलने के लिए जामा मस्जिद शाही कटरा की तरफ बढ़ रहा था, लोगों का उत्साह बढ़ता ही जा रहा था।
इस ऐतिहासिक पल को देखने और उसे अपने कैमरे में कैद करने के लिए लोग शाम से ही शाही कटरा मैदान पर इकट्ठा होने लगे थे। प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद था। चप्पे चप्पे पर सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ था,और हर जगह पुलिस तैनात थी।
यूं तो भरत मिलाप की तैयारियां काफी पहले से चलती रहती हैं परंतु रविवार की रात तैयारियां जोरों पर थीं। सबसे पहले शाही मस्जिद के गेट को लोहे के बड़े बड़े एंगल लगा कर उसके बाद एक और दरवाजा लगा कर ढक दिया गया था। गेट के सामने पुलिस चेन बना कर खड़ी हो गई थी ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
सन 2005 में प्रशासन की थोड़ी सी लापरवाही से दंगे भड़क उठे थे,जो महीनों तक चले थे।
चारों भाइयों के मिलन के इस भावुक पल से सभी की आंखें नम थीं। सूर्य की नव प्रस्फुटित रश्मियां और हजारों की भीड़ इस ऐतिहासिक मिलन की साक्षी बनी।
मऊ के इस ऐतिहासिक भरत मिलाप की परंपरा रही है कि भरत मिलाप के बाद डीएम आरती उतारते हैं। परंतु इस बार बुलाने पर भी जिले के आला अधिकारी शाही नहीं पहुंचे। नगर पालिका की बिल्डिंग पर मौजूद जिलाधिकारी और एसपी ऊपर से ही इशारा किये और अपने स्थान पर प्रतिनिधियों एडीएम और एएसपी को भेजा। एएसपी और एडीएम ने चारों भाइयों की आरती उतारी।
रामलीला कमेटी के अनुसार नगर के शाही कटरा स्थित जामा मस्जिद से प्रभु श्रीराम के विमान को स्पर्श कराने की परंपरा रही है। बताया जाता है कि मऊ की इस रामलीला को शाहजहां की बड़ी बेटी जहां आरा ने शुरू कराया था। गंगा जमुनी तहजीब की भारतीय परंपरा से सराबोर इस रामलीला में भरत मिलाप के दिन जहां आरा इसी मस्जिद से चारों भाइयों का मिलन खुद देखती थी। इसलिए परंपरानुसार मस्जिद गेट के ठीक सामने भरत मिलाप मंच बनाया जाता है । बताया जाता है कि जब प्रभु का विमान शाही कटरा मैदान पहुंचता था तो जहां आरा खुद प्रभु श्री राम का आशीर्वाद लेने आती थीं। इस्लाम में पर्दा प्रथा के कारण विमान को मस्जिद गेट तक ले जाया जाता था,जहां वह आशीर्वाद लेती थीं। कालांतर में धीरे धीरे यह प्रथा चलती रही और थोड़ा स्वरूप बदल कर इसको गेट से टकराने में बदल दिया गया। पिछले 500 वर्षों से यह परंपरा चली आ रही,जो आज भी बदस्तूर जारी है।