भारत में ला नीना की वजह से मानसूनी मौसम लंबा खींचता है,और सामान्य से अधिक वर्षा होती है जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक अच्छा संकेत है, वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसकी वजह से कम बारिश भी हो सकती है। इसके प्रभाव से पूरे भारत में सामान्य से अधिक ठंड पड़ती है।
इस साल गर्मियों में भीषण गर्मी पड़ी है, जो अभी तक जारी है। जबकि बरसात लगभग औसत ही हुई है। परंतु वैज्ञानिकों की मानें तो भीषण गर्मी के बाद इस साल भीषण ठंड पड़ने की भी संभावना है। वैज्ञानिकों की मानें तो सितम्बर के महीने में ला नीना के सक्रिय होने की पूरी उम्मीद है, जिसकी वजह से इस बार जबरदस्त ठंड पड़ेगी।
' ला नीना ' और ' अल नीनो ' दो अलग अलग महासागरीय घटनाएं हैं। ' अल नीनो ' का अर्थ है ' छोटा पुत्र' जबकि ' ला नीना ' का अर्थ है ' छोटी पुत्री '। अल नीनो की वजह से तापमान में वृद्धि होती है, जबकि ला नीना में पूर्वी भू मध्य रेखीय प्रशांत महासागर की सतह का तापमान 3 से 4 डिग्री तक कम हो जाता है। जिसकी वजह से उस वर्ष ठंड ज्यादा पड़ती है।
भारत में ला नीना की वजह से मानसूनी मौसम लंबा खींचता है,और सामान्य से अधिक वर्षा होती है जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक अच्छा संकेत है, वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसकी वजह से कम बारिश भी हो सकती है। इसके प्रभाव से पूरे भारत में सामान्य से अधिक ठंड पड़ती है।