हिंदी के बाद भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग लंबे समय से की जा रही है। अ
हिंदी के बाद भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग लंबे समय से की जा रही है। अब सांसद राजीव राय ने भी पत्र लिख कर भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग की है। सांसद ने नियम 377 के तहत इस मामले को संसद में उठाने की मांग की है।
अपने लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि भोजपुरी के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। सरकार लगातार भोजपुरी भाषा को उपेक्षित कर रही,जबकि पूरे भारत में लगभग 50 मिलियन लोग भोजपुरी भाषा बोलते हैं। इसके अलावा विदेशों में भी लगभग 30 लाख लोग इस भाषा को बोलते हैं। सरकार की लगातार उपेक्षा के कारण यूनेस्को ने इसे भाषा विश्व एटलस में इसे संकटग्रस्त भाषा के रूप में रखा है।
सरकार ने इसके लिए कई वादे किए हैं परंतु आज भी उन पर अमल नहीं हो पाया है। यदि भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कर लिया जाता है तो इससे इस भाषा को विकसित होने में काफी सहायता मिलेगी।