
जहां आज भारत चांद की सतह पर अपने कदम रखने की उपलब्धि पर गर्व कर रहा है, वहीं उसी देश के एक छोटे से गांव में एक जिंदगी सिर्फ इसलिए दम तोड़ देती है क्योंकि वहां तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाई।
यूपी के मऊ जनपद में रानीपुर ब्लॉक स्थित ग्राम ओहनाइच (पोस्ट बगली पिजरा) में 62 वर्षीय गुलाबचंद श्रीवास्तव की हालत सुबह अचानक बिगड़ गई। घबराए परिजनों ने तुरंत सरकारी एंबुलेंस को बुलाया, लेकिन गांव में पक्की सड़क न होने के कारण एंबुलेंस घर तक नहीं पहुंच सकी। इलाज न मिलने की पीड़ा में तड़पते हुए गुलाबचंद ने दम तोड़ दिया।
परिवार में मातम पसरा है, आंखों में आंसू हैं और दिल में सवाल — क्या विकास सिर्फ शहरों तक सीमित है? क्या गांवों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं?
इस हादसे ने न केवल एक परिवार को उजाड़ा, बल्कि सरकारी व्यवस्था और विकास के दावों की हकीकत को भी सामने ला दिया। चांद तक पहुंचने का सपना देखने और कालोनी बसाने वाले देश को अब ज़मीन पर अपने लोगों की बुनियादी जरूरतों की ओर भी देखना होगा।
अब विकास पर प्रश्न चिन्ह लगता है — क्या सिर्फ अंतरिक्ष में उड़ान ही विकास है, या फिर हर नागरिक तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना भी उतना ही ज़रूरी है? इसका जवाब आने वाला वक्त और सिस्टम देगा!