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परमाणु हथियार को लेकर ईरान का दो टूक, कहा- अमेरिकी डील से पहले न्यूक्लियर ठिकानों की जांच की अनुमति नहीं देंगे

ईरान ने कहा कि अमेरिका से अंतिम समझौते के बाद ही परमाणु ठिकानों की जांच की अनुमति देगा। IAEA प्रमुख के निरीक्षण दावे को तेहरान ने खारिज कर दिया।
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भारत

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Ankit Sai

Jun 24, 2026

US- Iran

डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ANI Photo

Iran Nuclear Sites Inspection: ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों की जांच को लेकर अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी के दावे को खारिज कर दिया है। ईरान ने साफ कहा है कि अमेरिका के साथ अंतिम समझौता होने से पहले किसी भी परमाणु स्थल या परमाणु सामग्री तक पहुंच की अनुमति नहीं दी जाएगी। ईरान का कहना है कि निरीक्षण से जुड़ा कोई भी फैसला केवल US के साथ होने वाली अंतिम डील की शर्तों के आधार पर लिया जाएगा।

US डील तक परमाणु जांच पर रोक

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सोशल मीडिया एक्स पर बयान जारी करते हुए कहा कि फिलहाल परमाणु ठिकानों तक पहुंच देने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने लिखा, 'ग्रॉसी के अनुरोध के बावजूद, स्विट्जरलैंड में उनके साथ कोई बैठक नहीं हुई। उन्होंने आगे कहा कि जिन परमाणु ठिकानों को नुकसान पहुंचा है या जहां परमाणु सामग्री मौजूद है, वहां निरीक्षण की अनुमति देने का फैसला केवल अमेरिका के साथ अंतिम समझौते के तहत ही लिया जाएगा।

प्रतिबंध हटाने की शर्त पर अड़ा ईरान

ईरान ने कहा कि परमाणु निगरानी दोबारा शुरू करने के लिए अमेरिका और अन्य पक्षों को पहले अपने कदम उठाने होंगे। ईरान का कहना है कि सभी प्रतिबंध हटाने और दूसरे जरूरी कदम उठाने के बाद ही आगे की प्रक्रिया पर विचार किया जाएगा। गरीबाबादी ने कहा, 'इन मुद्दों पर सिर्फ एक अंतिम समझौते के दायरे में और दूसरी तरफ से सभी प्रतिबंधों और अन्य उपायों को खत्म करने के लिए व्यावहारिक कदम उठाए जाने के बाद ही विचार और फैसला किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि मीडिया के जरिए दबाव बनाकर किसी समझौते को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।'

IAEA प्रमुख ने कहा निरीक्षण होना तय

IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने कहा कि ईरान के परमाणु ठिकानों का निरीक्षण जल्द किया जाएगा। फुकुशिमा दाइची परमाणु संयंत्र में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में ग्रॉसी ने कहा कि राजनीतिक बयान अपनी जगह हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच हुए समझौते के अनुसार परमाणु गतिविधियों की निगरानी IAEA की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा, 'मैं राजनीतिक बयानों को समझ सकता हूं, वे असलियत का हिस्सा हैं, लेकिन मैं आपको जिस बुनियादी बात की याद दिलाना चाहता हूं कि दोनों राष्ट्रपतियों के बीच मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (Memorandum of Understanding) पर हस्ताक्षर हुए हैं।'

परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से विवाद

ईरान और पश्चिमी देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ है। साल 2025 में इजरायल और ईरान के बीच हुए युद्ध के बाद ईरान ने IAEA निरीक्षकों की पहुंच को सीमित कर दिया था। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आशंका है कि ईरान के पास यूरेनियम का भंडार हो सकता है, जिससे वह भविष्य में परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल कर सकता है। हालांकि ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।