- मेरठ की मेयर और उसके पति को बसपा से निकलने पर शुरु हुआ विरोध -बसपा के 12 नेताओं ने पार्टी से दिया इस्तीफानुकसान की भरपाई करने के लिए दलित नेता को सौंपी गई जिले की कमान
मेरठ. उत्तर प्रदेश में पिछले दिनों हुए उपचुनाव में पत्ता साफ होने के बाद बसपा में बड़ी बगावत सामने आई है। यह बगावत पूर्व विधायक योगेश वर्मा और उनकी पत्नी और मेरठ की महापौर सुनीता वर्मा को पार्टी से निष्कासित करने के बाद हुई है। उसके बाद से बसपा में घमासान मचा हुआ है। योगेश वर्मा गुट के नगर निगम के 12 सभासदों ने इस्तीफा दे दिया है। पिछले दो दिन से इस्तीफा देने का सिलसिला जारी है। इन 12 सभासदों ने योगेश वर्मा के घर पहुंचकर महापौर को अपना इस्तीफा सौंपा। महापौर सुनीता वर्मा का कहना है कि हमें बिना गलती किए सजा मिली है। बिना हमारा पक्ष सुने ही एकतरफा कार्रवाई की गई है।
मेरठ में बसपा में मची हलचल की जानकारी पार्टी हाईकमान को मिलने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने दलित नेता के निष्कासन के बाद दूसरे दलित नेता को मेरठ में लगाने की रणनीति अपनाते हुए एमएलसी अतर सिंह राव को मेरठ और बुलंदशहर का इंचार्ज बनाया है। अतर सिंह राव ने चार्ज संभालने के बाद पार्टी कार्यालय में नगर निगम के पार्षदों के साथ बैठक की। जिलाध्यक्ष सुभाष प्रधान ने दावा किया कि बैठक में पार्टी के कई पार्षद शामिल हुए हैं। नए इंचार्ज अतर सिंंह राव का कहना है कि योगेश अनुशासनहीनता कर रहे थे, इसलिए उनका पार्टी से निकष्कासन किया गया। पार्टी ने उन्हें इतना सम्मान दिया, लेकिन वह कभी भाजपा तो कभी सपा में गुपचुप तरीके से लगे हुए थे। अब वह पार्षदों को लेकर दुष्प्रचार कर रहे हैं।
वहीं, महापौर सुनीता वर्मा का कहना है कि नगर निगम के जिन पार्षदों ने इस्तीफा दिया, उनमें इकरामुद्दीन, जाहरा, कय्यूम अंसारी, मोहम्मद शहजाद, शब्बीर कस्सार, आस मोहम्मद, असगरी बेगम, सईद अख्तर, रविंद्र कुमार, कुलदीप सिंह, प्रदीप वर्मा व अमित राव शामिल हैं।