
मेरठ ईव्ज चौराहा आबकारी ऑफिस में आज एंटी करप्शन की टीम ने छापा मारकर एक लिपिक को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। आबकारी विभाग में तैनात लिपिक राजकुमार 5 हजार रुपये की रिश्वत अपने ही विभाग में तैनात एक हेड कांस्टेबल से मांग रहा था।
आबकारी विभाग के रिश्वतखोर लिपिक को एंटी करप्शन की टीम पकड़कर कोतवाली ले गई। जहां पर रिश्वतखोर लिपिक राजकुमार सिंह से पूछताछ की हो रही है। पूछताछ के दौरान आबकारी विभाग के लिपिक राजकुमार सिंह ने अपने को निर्दोष बताया।
ये है पूरा मामला
आबकारी विभाग में कार्यरत हेड कांस्टेबल सुरेश कुमार की तैनाती गाजियाबाद में है। साल 2021 में सुरेश कुमार बीमार हुए और अपना इलाज कराया। सुरेश कुमार के इलाज में तीन लाख रुपये खर्च हुए। सुरेश कुमार ने चिकित्सापूर्ति के अपने सभी कागजात लिपिक राजकुमार के पास जमा कर दिए।
आरोप है कि लिपिक राजकुमार ने पांच हजार रुपये की रिश्वत नहीं मिलने पर कागजात रोक लिए और आवश्यक कार्रवाई कर उनको आगे नहीं बढ़ाया। इसके एवज में सुरेश कुमार के भाई ओपी राणा ने लिपिक राजकुमार को एक हजार रुपये भी दिए थे। लेकिन राजकुमार पांच हजार रुपये की मांग कर रहा था।
ओपी राणा ने बताया,'इसकी शिकायत एंटी करप्शन मेरठ ऑफिस में की गई'। एंटी करप्शन टीम ने रिश्वतखोर लिपिक राजकुमार को पकड़ने का प्लान बनाया। एंटी करप्शन टीम ने ओपी राणा को पांच हजार रुपये पाउडर लगे दिए।
ओपी राणा आबकारी ऑफिस पहुंचे और उन्होंने लिपिक राजकुमार को पांच हजार रुपये दिए। लिपिक राजकुमार ने जैसे ही पांच हजार रुपये लेकर जेब में रखे इसी दौरान एंटी करप्शन की टीम ने रिश्वत लेने के आरोप में आबकारी विभाग के लिपिक राजकुमार सिंह को गिरफ्तार कर लिया।