हाथी से उतरकर हाथ का दामन थामने को बेचैन पूर्व सांसद
मेरठ। मेरठ से बसपा सांसद रहे शाहिद अखलाक बसपा से बगावत कर हाथ का दामन थाम सकते हैं। शाहिद अखलाक और हाजी याकूब कुरैशी की राजनैतिक अदावत जग जाहिर है। बसपा ने हाजी याकूब कुरैशी को मेरठ से प्रभारी बनाया है। महागठबंधन होने के कारण सपा अपना कोई उम्मीदवार नहीं उतार रही। सीट महागठबंधन ने बसपा के खाते में दी है। बसपा से हाजी शाहिद भी चुनाव लड़ना चाहते थे। वे भी मायावती से मिलकर आए थे, लेकिन मायावती ने शाहिद अखलाक को टिकट के लिए मना कर दिया था। लिहाजा शाहिद अब दूसरा ठिकाना तलाश रहे हैं।
महागठबंधन में जब उन्हें राजनीतिक पनाह नहीं मिली तो वे कांग्रेस के दर पर पहुंच गए। चर्चा है कि पूर्व सांसद शाहिद अखलाक कांग्रेस के वेस्ट यूपी प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी मिलने गए थे। 'पत्रिका' ने जब शाहिद अखलाक से बात की तो उनका कहना था कि वे चुनाव जरूर लड़ेंगे। किस पार्टी से लड़ेंगे, यह अभी बता नहीं सकते। बता दें कि हाजी याकूब कुरैशी को बसपा से लोकसभा प्रभारी बनाए जाने के बाद पूर्व सांसद शाहिद अखलाक ने मोर्चा खोल दिया है। हाजी याकूब के टिकट फाइनल होते ही शाहिद अखलाक विरोध में उतर गए हैं। ज्योतिरादित्य सिघिया से मुलाकात के बाद सांसद हाजी शाहिद अखलाक कांग्रेस का हाथ थाम सकते हैं। अगर कांग्रेस हाजी शाहिद अखलाक को चुनाव लड़वाती है तो मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट का चुनाव काफी रोचक होगा।
ज्योतिरादित्य सिंघिया से पूर्व सांसद की सियासी मुलाकात के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा जोरों पर हैं कि शाहिद अखलाक मेरठ-हापुड़ लोकसभा चुनाव में उतर सकते हैं। शाहिद अखलाक ने 'पत्रिका' को बताया कि वे और ज्योतिरादित्य सिंधिया लोकसभा सदन में रहे हैं। वह मेरे मित्र हैं और इसी नाते मैंने बीती रात उनसे मुलाकात की थी। जाहिर सी बात है कि इस मुलाकात में वेस्ट यूपी के समीकरण को लेकर भी चर्चा हुई। शाहिद अगर कांग्रेस में शामिल हुए तो पश्चिम उप्र की मुस्लिम राजनीति करवट ले सकती है।