मेरठ

‘बेटी हुई है’, नन्ही परी के स्वागत में सड़क पर उतरा परिवार, गुब्बारों से सजी कारों से निकाला काफिला

Celebration On Birth Of Daughter: बेटी के जन्म पर परिवार ने अनोखे तरीके से जश्न मनाया। नन्ही परी के स्वागत में परिवार सड़क पर उतरा। गुब्बारों से सजी कारों से काफिला निकाला।
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Apr 08, 2026
celebrates birth of daughter with unique procession of balloon adorned vehicles meerut
नन्ही परी के स्वागत में सड़क पर उतरा परिवार। फोटो सोर्स- पत्रिका न्यूज

Celebration On Birth Of Daughter: उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने समाज में बदलती सोच की मिसाल पेश की। जहां पहले बेटियों के जन्म पर उत्साह कम दिखाई देता था, वहीं अब नई पीढ़ी बेटियों को गर्व और खुशी के साथ स्वीकार कर रही है। हाल ही में शहर में एक परिवार ने बेटी के जन्म को सार्वजनिक उत्सव की तरह मनाकर एक सकारात्मक संदेश दिया।

गुलाबी गुब्बारों से सजी कारों में निकला जश्न

शहर की सड़कों पर 2 कारें गुलाबी गुब्बारों से सजी हुई नजर आईं। कारों पर बड़े-बड़े पोस्टर लगे थे, 'बेटी हुई है'। यह अनोखा नजारा देख राहगीर रुक गए और इस खुशी के पल को अपने मोबाइल में कैद करने लगे। कई लोगों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी साझा किया, जो तेजी से वायरल हो गया।

अस्पताल से घर तक खास अंदाज में स्वागत

यह अनोखा जश्न खरखौदा (KharKhoda) क्षेत्र के बिजौली गांव निवासी कमल सिंह के परिवार का था। कमल सिंह एक जूनियर हाईस्कूल में शिक्षक हैं। उनके बेटे शुभम खटाना की शादी 14 दिसंबर 2024 को प्रियंका से हुई थी।

5 अप्रैल को प्रियंका ने एक बेटी को जन्म दिया। परिवार ने इस खुशी को खास बनाने का फैसला किया। शुभम अपनी पत्नी और नवजात बेटी को अस्पताल से घर लाने के लिए दो कारों को गुलाबी गुब्बारों से सजाकर पहुंचे और पूरे रास्ते जश्न मनाते हुए घर लाए।

‘बेटी ही लक्ष्मी है’—परिवार का संदेश

शुभम खटाना, जो MSC की पढ़ाई कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि उनके लिए बेटा और बेटी दोनों समान हैं। उन्होंने अपनी बेटी को ‘लक्ष्मी’ का रूप मानते हुए कहा कि उनके घर खुशहाली आई है। इसी सोच के साथ पूरे परिवार ने बेटी के जन्म को उत्सव की तरह मनाने का निर्णय लिया।

शिक्षा ने बदली सोच, समाज को मिला संदेश

कमल सिंह का मानना है कि शिक्षा ने समाज की सोच को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि आज बेटियां पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं, जिससे लोगों की मानसिकता बदल रही है।

समाज में सकारात्मक बदलाव की मिसाल

यह घटना केवल एक परिवार की खुशी तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में आ रहे सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। बेटी के जन्म को इस तरह से मनाना यह दर्शाता है कि अब लोग बेटियों को बोझ नहीं, बल्कि सम्मान और गर्व के रूप में देख रहे हैं।

Updated on:
08 Apr 2026 12:28 pm
Published on:
08 Apr 2026 12:28 pm