CM Yogi Adityanath visits Meerut इस समय भाजपा की केंद्र और प्रदेश सरकार के लिए पश्चिमी उप्र इस समय आखिर इतना अहम क्यों हो गया है। यह सवाल राजनैतिक गलियारों में गूंज रहा है। बता दें कि 2022 में विधानसभा चुनाव के बाद से पश्चिमी उप्र भाजपा के एजेंडे में प्रमुख रूप से है। यहीं कारण है कि हर दूसरे दिन पश्चिमी उप्र के बडे़ शहरों में सत्ताधारी मंत्री या संगठन पदाधिकारी की उपस्थिति बनी रहती है। निकाय चुनाव में भाजपा जनाधार नहीं गिरने देना चाहती है।
CM Yogi Adityanath visits Meerut मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पश्चिमी उप्र बराबर नजर बनाए हुए हैं। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी दौरे कर पश्चिमी उप्र के मतदाताओं की नब्ज भांप रहे हैं। पिछले दस दिन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पश्चिमी उप्र में यह दूसरा दौरा होगा। इससे पहले वो सहारनपुर का दौरा कर चुके हैं। भाजपा पश्चिम के माध्यम से निकाय चुनावों की संगठन के जमीन स्तर पर मजबूत कर 2024 के सफलता की पारी खेलना चाहती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने मेरठ के इस दौरे से बड़ा राजनीतिक संदेश देने की तैयारी के साथ आ रहे हैं। भाजपा और उसकी सरकार का एकमात्र एजेंडा पश्चिमी उप्र और एनसीआर के जिलों में चल रही विकास योजनाओं की निगरानी कर उनको रफ्तार देना भी है।
बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गत दिनों मंत्रियों को जिलों का प्रभार देते समय क्षेत्रीय संतुलन भी साधा था। मुख्यमंत्री एवं दोनों उपमुख्यमंत्री पूर्वांचल से आते हैं। जबकि पश्चिम उप्र में महज एक कैबिनेट मंत्री मिला। पार्टी ने क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए पश्चिम से प्रदेशाध्यक्ष बनाने का विकल्प चुना है। लेकिन क्षेत्र के अलावा जातीय समीकरण पर पेंच फंसा है। सीएम योगी ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य एवं ब्रजेश पाठक को पूर्वांचल, अवध व बुंदेलखंड क्षेत्र के 25-25 जिलों का प्रभारी बनाया। जबकि क्षेत्रीय संतुलन साधते हुए पश्चिम यूपी को विशेष तवज्जो देते हुए यहां के सभी जिलों को अपने पास रखा है। बता दें कि पश्चिमी उप्र प्रदेश की राजनीति का पावरहाउस बन चुका है। इस पावरहाउस पर जिस दल की पकड़ होगी वहीं सत्ता के सिहासन तक पहुंचेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संगठन और जनप्रतिनिधियों के साथ मंथन कर यह जता चुके हैं कि अब पार्टी पूरी तरह चुनावी मोड में है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रचंड जीत हासिल की थी। लेकिन निकाय चुनावों में भाजपा को काफी संघर्ष करना पड़ा था। जिसमें मेरठ, मुरादाबाद , सहारनपुर और गाजियाबाद के रूप में चार नगर निगम हैं। जिसमें भाजपा को मेरठ में हार मिली थी। जबकि नगर पंचायत एवं नगर पालिका के चुनावों में भी भगवा खेमे को बड़ा झटका लगा था। यहीं कारण है कि किसी भी चुनाव को भाजपा बड़ी गंभीरता से लेकर चल रही है।