
मेरठ. चुनाव के दौरान नाबालिग बच्चों से चुनावी प्रचार करवाया जा रहा है। जब से चुनाव प्रचार शुरू हुआ है, तभी से महानगर क्षेत्र में बालश्रम कानून का उल्लंघन हो रहा है। यह सब तब हो रहा है जब निकाय चुनाव की घोषणा होने के साथ ही बच्चों से रैलियों में प्रचार, झंडे-बैनर उठवाने या चुनाव सम्बन्धी कोई भी काम नहीं कराने के निर्देश दिए गए थे। सभी प्रत्याशी और राजनीतिक दल को निर्देश जारी करने के साथ ही साफ शब्दों में कहा गया था कि पकड़े जाने पर चुनाव आयोग उन पर बाल श्रम कानून और किशोर न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई कर सकता है। जिला निर्वाचन अधिकारी ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को पत्र भेज कर इसकी हिदायत भी दी थी। लेकिन मेरठ में चुनाव प्रचार के दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी के आदेश और चुनाव आयोग की हिदायत हवा में उड़ा दिख रहा है।
मेरठ शहर में सड़कों पर छोटे-छोटे बच्चे रिक्शों में बैठकर जोर-शोर से प्रत्याशी और पार्टियों का प्रचार कर रहे हैं। लेकिन, यह किसी को दिखाई नहीं दे रहा। मान्यता प्राप्त राजनैतिक दल के प्रत्याशी हो या निर्दलीय सभी के रिक्शा प्रचार और पंफलेट बांटने की कमान बच्चों के हाथों में ही है। प्रशासनिक स्तर पर भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। हैरानी की बात है कि इन बच्चों से यह चुनाव प्रचार राष्ट्रीय पार्टियों के उम्मीदवार भी करा रहे हैं। जबकि चुनाव आयोग ने इन पार्टियों को नोटिस जारी हिदायत दे चुका है कि 18 साल से कम उम्र के लोगों से श्रम न करवाएं।
गौरतलब है कि भारत निर्वाचन आयोग और बालश्रम के बारे में बम्बई हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए राजनीतिक दलों को पत्र भेजकर यह सुनिश्चित करने के लिए कहा था कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान ऐसे किसी भी कार्य में बच्चों को नहीं लगाया जाए। इसके लिए छह साल तक की सजा का प्रावधान है। बच्चों से प्रचार सामग्री बंटवाना, तम्बू-कुर्सियां लगवाना या अन्य कोई चुनाव सम्बन्धी कार्य नहीं कराया जा सकता।