
मेरठ। लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलने के बाद विपक्षी पार्टियाें में हार का मंथन चल रहा है। इसमें हार के कारणों को ढूंढ़ा जा रहा है। वेस्ट यूपी की मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी हरेंद्र अग्रवाल तीसरे स्थान पर रहे हैं। हरेंद्र उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यममंत्री स्वर्गीय बनारसी दास के पुत्र हैं। इस सीट पर भाजपा राजेंद्र अग्रवाल ने गठबंधन के याकूब कुरैशी को 4729 वोटों से हराया। जीत के इतने कम अंतर के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी कभी भी दौड़ में शामिल नहीं रहे आैर पहले वोट की गिनती से लेकर आखिरी वोट तक तीसरे स्थान पर बने रहे। उन्हें 34,479 वोट मिले, यानि पिछले लोक सभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को मिले वोट से 8432 कम।
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नगमा को मिले थे 42,911 वोट
मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर कांग्रेस का प्रदर्शन लगातार गिरा है। लोकसभा चुनाव 2014 में कांग्रेस ने फिल्म अभिनेत्री नगमा को मेरठ से अपना प्रत्याशी बनाया था। उनके चुनाव प्रचार में खूब भीड़ भी जुटी, लेकिन उन्हें 42,911 वोट ही मिल सके आैर वह चौथे स्थान पर रही थी। इस बार कांग्रेस ने पहले वरिष्ठ अधिवक्ता डा. आेपी शर्मा को प्रत्याशी घोषित किया था, फिर पूर्व मुख्यमंत्री बनारसी दास के बेटे पूर्व एमएलसी हरेंद्र अग्रवाल को टिकट दिया। इसके बावजूद कांग्रेस के प्रदर्शन पर कोर्इ फर्क नहीं पड़ा, उल्टे वह नगमा के बराबर भी वोट नहीं पा सके। उन्होंने नगमा से 8,432 वोट कम पाते हुए 34,479 वोट प्राप्त किए। जबकि भाजपा आैर गठबंधन के उम्मीदवारों को पांच लाख से ज्यादा वोट मिले।
चुनाव प्रचार में भी नहीं दिखे हरेंद्र
कांग्रेस की स्थिति पिछले चुनाव की तरह इस बार भी रही। कांग्रेस का चुनाव प्रचार भी फीका रहा। इसकी एक वजह थी वरिष्ठ अधिवक्ता डा. आेपी शर्मा का टिकट बदलना। सूत्र बताते हैं कि टिकट बदलने से कांग्रेस कार्यकर्ताआें व समर्थकों के दो धड़े ब्राह्मण आैर अधिवक्ता वर्ग नाराज हो गए थे। अंतर्कलह की एेसी नाराजगी पिछले चुनाव में नगमा को भी झेलनी पड़ी थी। अब लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम आने के बाद कांग्रेस की स्थिति आैर भी कमजोर लग रही है, क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री का बेटा फिल्म अभिनेत्री नगमा के बराबर भी वोट हासिल नहीं कर सका।