Lathicharge on lawyers in Hapur: हापुड में वकीलों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में आज मेरठ सहित पूरे पश्चिम यूपी के जिलों की अदालत में कामकाज ठप रहा। वकीलों के हड़ताल पर जाने से कचहरी में कोई काम नहीं हुआ।
Lathicharge on lawyers in Hapur: हापुड़ में वकीलों पर पुलिस के लाठीचार्ज के विरोध और गाजियाबाद में वकील हत्याकांड के विरोध में सोमवार आज मेरठ सहित प्रदेश भर की अदालतों में कामकाज ठप रहा। आज सुबह से ही अधिवक्ता सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। मेरठ में अधिवक्ताओं ने कचहरी में मार्च निकाला और हंगामा प्रदर्शन किया। पश्चिमी यूपी में मेरठ, बुलंदशहर, हापुड, बागपत, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, सहारनपुर, नोएडा और गाजियाबाद सहित सभी जिलों में अधिवक्ताओं ने कचहरी में काम बंद रखककर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन कर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। यूपी बार काउंसिल अध्यक्ष शिव किशोर ने आज हड़ताल को लेकर कहा कि शासन प्रशासन का रवैया पक्षपातपूण है। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मेरठ में जनपद में अधिवक्ताओं ने कार्य बहिष्कार किया। इसके न्यायायिक कार्य और मुकदमे प्रभावित हुए। आज पेशी भी नहीं हुई। मेरठ जिला बार एसोसिएशन और मेरठ बार एसोसिएशन के बैनर तले हापुड़ के अधिवक्ताओं पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने की घटना निंदा की गई। अधिवक्ताओं ने लाठीचार्ज के दोषी पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। घटना को लेकर अधिवक्ताओं ने रोष व्यक्त किया।
हड़ताल की वजह से न्यायालयों में कामकाज पूरी तरह से ठप रहा। आज कोर्ट में लगे सभी मुकदमों की सुनवाई भी टल गई। जिसकी वजह से वादी और प्रतिवादियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अधिवक्ताओं की हड़ताल को देखते हुए पुलिस-प्रशासन सतर्क रहा। यूपी बार काउंसिल के आह्वान पर गाजियाबाद में वकीलों ने आज न्यायिक कार्य को ठप कर दिया। वकीलों ने वादकरियों को कचहरी परिसर के भीतर नहीं जाने दिया। कचहरी में जाने वाले सभी मार्गों पर वकील कुर्सी रखकर बैठ गए।
वकीलों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। वकीलों ने जिलाधिकारी आफिस तक जुलूस निकाला। वकीलों का धरना प्रदर्शन दोपहर बाद तक जारी है। वकीलों और वादकरियों को कचहरी में प्रवेश नहीं करने देने के कारण पूरी कचहरी में सन्नाटा रहा है। न्यायिक कार्य पूरी तरह बंद है। वकील के गुट गेटों पर जमे हुए हैं और किसी को अंदर नहीं जाने दे रहे हैं। सिर्फ न्यायिक अधिकारीगण और स्टाफ अंदर जा रहे हैं।