Hastinapur MLA Dinesh Khatik case जलशक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटीक के इस्तीफा प्रकरण ने केंद्रीय नेतृत्व से लेकर भाजपा की प्रदेश सरकार तक को हिला दिया। दलित कोटे से मंत्री होने के कारण मामला और अधिक तूल पकड़ गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात करने के बाद जलशक्ति मंत्री दिनेश खटीक तेवर कुछ नरम हुए हैं। वहीं हस्तिनापुर विधायक दिनेश खटीक के मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सरकार ने प्रदेश के केंद्रीय मंत्री और राज्यमंत्रियों में बेहतर तालमेल की कवायद भी शुरू कर दी है।
Hastinapur MLA Dinesh Khatik case जलशक्ति मंत्रालय में हुए तबादले में भ्रष्टाचार का आरोप और अधिकारियों की अनदेखी का आरोप लगाकर मंत्रीपद से इस्तीफा देने वाले हस्तिनापुर विधायक दिनेश खटीक ने पूरी भाजपा और यूपी सरकार को हिला दिया। भाजपा नेतृत्व को जलशक्ति राज्य मंत्री दिनेश खटीक के आरोपों की चिंता के पीछे उनका दलित होना भी एक बड़ा फेक्टर रहा। नेतृत्व को इस बात का डर सता रहा था कि अगर मामले को जल्द नहीं सुलझा तो सरकार और भाजपा संगठन में जातिगत विरोध के स्वर तेज हो उठेंगे।
बता दें कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर ओबीसी विरोधी होने का आरोप लगा कई मंत्रियों और विधायकों ने पार्टी से किनारा किया था। उस दौरान भी स्थिति संभालने के लिए शीर्ष नेतृत्व को कड़ी मेहनत करनी पड़ी थी। इस बार भाजपा नेतृत्व को डर है कि अगर मंत्री दिनेश खटीक मामले को नहीं संभाला तो विरोध के सुर और उभर सकते हैं। यहीं कारण था कि हस्तिनापुर विधायक और जलशक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटीक के आरोपों पर नेतृत्व गंभीर हो गया। अब जहां डिप्टी सीएम केशव मौर्य के जरिये नौकरशाही को मंत्रियों और कार्यकर्ताओं का सम्मान करने के निर्देश दिए गए हैंं।
वहीं प्रदेश सरकार के कैबिनेट और राज्यमंत्रियों के बीच बेहतर तालमेल की कवायद भी शुरू की जा चुकी है। बता दें कि तबादला विवाद के कारण कुछ और मंत्रियों में भी सीएम योगी से नाराज हैं। वहीं दूसरी ओर जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने दावा किया कि राज्यमंत्री दिनेश खटीक से उनकी बातचीत होती रहती है। संघ के एक बड़े पदाधिकारी ने बताया कि अब प्रदेश सरकार में केंद्रीय मंत्रियों और राज्यमंत्रियों में बेहतर तालमेल के लिए संवाद प्रकिया की शुरूआत होगी। जो कि बहुत जरूरी थी।