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ऊपर लगा था बेड…नीचे तक हथियारों का तहखाना, बन रहे थे तमंचा और बंदूक

Meerut Illegal Weapon Factory : मेरठ के अल्लीपुर में बेड के नीचे छिपे गुप्त तहखाने में चल रही अवैध हथियार फैक्ट्री का पुलिस ने भंडाफोड़ किया। .32 बोर की पिस्टल बनाने वाले गिरोह के 11 सदस्य गिरफ्तार, भारी मात्रा में हथियार और उपकरण बरामद।

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मेरठ में अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़, PC- Gemini

मेरठ : यूपी पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। स्वाट टीम, पुलिस टीम और सर्विलांस टीम ने एक अवैध हथियारों की फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। मेरठ के अल्लीपुर गांव में डबल बेड के नीचे छिपा तहखाना और उसमें चल रही अवैध हथियार फैक्ट्री का चौंकाने वाला मामला पुलिस की त्वरित कार्रवाई से उजागर हो गया। बदमाशों ने सोचा था कि इस अनोखे तरीके से कभी कोई उन्हें पकड़ नहीं पाएगा, लेकिन लोहियानगर पुलिस और स्वाट टीम ने उनके पूरे मंसूबे पर पानी फेर दिया।

रविवार, 26 अप्रैल 2026 को लोहियानगर थाना क्षेत्र के ग्राम अल्लीपुर (कब्रिस्तान के पास) में एक किराए के मकान में छापेमारी की गई। मुखबिर की सूचना पर स्वाट टीम, सर्विलांस टीम और थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की।

घर के एक कमरे में रखे डबल बेड के नीचे एक गुप्त रास्ता बना हुआ था, जो सीधे तहखाने में जाता था। तहखाने का प्रवेश द्वार बेड के एक बॉक्स या कोने से खुलता था। अंदर अंधेरा भरा सकरा रास्ता नीचे उतरने के बाद चौड़ा हो जाता था, जहां दीवारों पर लाइटिंग बोर्ड लगे थे और वेंटिलेशन के लिए चौड़े पाइप लगाए गए थे। यहीं पर .32 बोर की पिस्टलें बनाई जा रही थीं।

पुलिस को मौके से मिलीं 8 पिस्टल

पुलिस को मौके से 8 तैयार पिस्टलें, 3 अधूरी पिस्टलें, मैगजीन, बैरल, अन्य उपकरण, कच्चा माल, तीन कारें और सात मोबाइल फोन बरामद हुए। इस फैक्ट्री से बनी पिस्टलें 35 हजार से 65 हजार रुपये में बेची जा रही थीं। पूछताछ में पता चला कि गैंग ने अब तक 150 से ज्यादा पिस्टलें विभिन्न जिलों में सप्लाई कर चुका था।

वायरल हुआ तहखाने का वीडियो

कार्रवाई के बाद तहखाने का सवा मिनट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में एक व्यक्ति मोबाइल की रोशनी में अंदर घुसता दिख रहा है। नीचे उतरने पर लाइटिंग, वेंटिलेशन पाइप और हथियार बनाने का कुछ कच्चा माल साफ नजर आ रहा है। लोग इस चालाकी को देखकर हैरान हैं कि इतने बड़े सेटअप को इस तरह छिपाया जा सकता है।

तीन बार बेची गई जमीन

  • जमीन मूल रूप से अल्लीपुर के नईमुद्दीन की थी, जिन्होंने करीब 8 साल पहले इसे खुर्जा की रहने वाली नाजिया उर्फ रजिया को लगभग 3 हजार रुपये प्रति गज के हिसाब से (कुल करीब 70 गज) बेच दी थी।
  • नाजिया ने नवंबर 2025 में यह मकान उमर को साढ़े सात लाख रुपये में बेच दिया। उस समय जमीन पर सिर्फ एक पुराना कमरा था। आगे का सारा निर्माण कार्य उमर ने ही करवाया।
  • उमर अपनी पत्नी और बच्चों के साथ यहां रहने आया। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह परिवार किसी से बातचीत नहीं करता था। घर का मुख्य दरवाजा हमेशा बंद रहता था। यहां तक कि निर्माण कार्य के दौरान भी अंदर से दरवाजा बंद रखा जाता था। ग्रामीणों को शक था कि कुछ गड़बड़ है।

गैंग का मास्टरमाइंड कौन?

घर भले ही उमर के नाम पर था, लेकिन पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड अल्लीपुर का ही रहने वाला रहीमुद्दीन (पुत्र सद्दीक) बताया जा रहा है। रहीमुद्दीन फरार है। उसने गांव के कुछ लोगों को साथ जोड़ा और खतौली, मुरादाबाद, मोदीनगर, बागपत, शामली आदि जिलों के हथियार तस्करों से नेटवर्क बनाया।

गिरफ्तारियां और फरार आरोपी

पुलिस ने 11 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें अलाउद्दीन, असलम, अनस, शक्ति, मुनीर, आरिश, शिवा शर्मा, गुड्डू सैनी, राजन और रजत शर्मा शामिल हैं।

अभी 10 लोग फरार हैं, जिनमें मुख्य आरोपी रहीमुद्दीन, उमर, इरफान, नदीम, नसीबू, अर्पण, फैजल प्रधान, नाजिम राणा, इश्तेकार मलिक और भूरा शामिल हैं। पुलिस इनकी तलाश में छापेमारी जारी रखे हुए है।

टीम जब गांव पहुंची तो ग्रामीण बात करने से बचते नजर आए। कई लोगों ने कहा कि यह परिवार शायद इसी राज के कारण आस-पड़ोस से कोई मतलब नहीं रखता था। चर्चा है कि गैंग ने आसपास कुछ और मकान भी खरीदे या किराए पर लिए हो सकते हैं, जिनकी जांच होनी चाहिए।

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