मेरठ

पूर्णिमा की रात में बनाई खीर खाने से होगा रोगों का खात्मा

Highlights अश्विन मास की शुक्ल पक्ष को है शरद पूर्णिमा इस रात सोलह कलाओं से पूर्ण होता है चंद्रमा

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Oct 29, 2020
शरद पूर्णिमा

पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क
मेरठ। अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। इस वर्ष यह 30 अक्टूबर को है। यूं तो साल में 12 पूर्णिमा तिथियां आती हैं लेकिन अश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को बहुत खास माना जाता है। इसे शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है।

ज्योतिषाचार्य भारत ज्ञान भूषण के अनुसार शरद पूर्णिमा से ही शरद ऋतु का आगमन होता है। शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की रोशनी से रात्रि में भी चारों और उजियारा रहता है। पूर्णिमा तिथि को चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों से अमृत बूंदें झरती हैं। पूर्णिमा की रात में जिस भी चीज पर चंद्रमा की किरणें गिरती हैं उसमें अमृत का संचार होता है। इसलिए शरद पूर्णिमा की रात में खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखी जाती है। पूरी रात चंद्रमा की रोशनी में खीर को रखा जाता है सुबह उठकर यह खीर प्रसाद के रुप में ग्रहण की जाती है। चंद्रमा की रोशनी में रखी गई खीर खाने से शरीर के रोग समाप्त होते हैं। शरद पूर्णिमा की रात को लक्ष्मी पूजन का भी बहुत महत्व माना गया है। इस दिन मां लक्ष्मी का आगमन होता है। शरद पूर्णिमा पर लक्ष्मी पूजा करने से वे प्रसन्न होती हैं।

शरद पूर्णिमा तिथि 2020
30 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 47 मिनट से पूर्णिमा तिथि का आरंभ हो जाएगा। अगले दिन यानि 31 अक्टूबर रात 8 बजकर 21 मिनट पर पूर्णिमा तिथि समाप्त होगी। 30 अक्टूबर को पूर्णिमा तिथि आरंभ होने के कारण इसी दिन शरद पूर्णिमा मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्य भारत भूषण के अनुसार एक अध्ययन के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन औषधियों की स्पंदन क्षमता अधिक होती है। रसाकर्षण के कारण जब अंदर का पदार्थ साद्र होने लगता है तब रिक्तिकाओं से विशेष प्रकार की ध्वनि उत्पन्न होती है। शोध के अनुसार खीर को चांदी के पात्र में बनाना चाहिए। चांदी में प्रतिरोधकता अधिक होती है। इससे विषाणु दूर रहते हैं।

Updated on:
29 Oct 2020 06:30 pm
Published on:
29 Oct 2020 06:23 pm
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