खास बातें राजपत्रित अवकाश से अलग अन्य त्योहारों पर मैसेज भ्रम पैदा करते हैं एक दिन पहले ही छुट्टी होने के मैसेज वायरल होने शुरू हो जाते हैं 'पत्रिका' की पड़ताल में ऐसे गलत मैसेजों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठी
मेरठ। एंड्रायड मोबाइल का प्रयोग करने वाला शायद ही कोई व्यक्ति ऐसा होगा जो कि फेसबुक व वाट्सएप प्रयोग न करता हो। अगर आप भी वाट्सएप का प्रयोग करते हैं तो दिन में कई फेक मैसेज भी देखते होंगे। जो किसी महापुरूषों के अवकाश से संबंधित होते हैं या फिर किसी सरकारी योजना के पालन से जुड़े होते हैं। इन मैसेजों की वास्तविकता लोगों को तब पता चलती है, जब उनके सामने सारी बातें सामने आती हैं। ऐसे अधिकांश मैसेज फर्जी होते हैं। इन मैसेजों में कई बार तो ऐसे भ्रम फैलता है कि लोग इनको सच मान लेते हैं। कभी अवकाश मानकर पैरेंट्स बच्चों को स्कूल नहीं भेजते तो कभी खुद भी छु्ट्टी कर लेते हैं। फेसबुक और वाट्सएप का रियल्टी चेक करने के लिए हमने अधिकारियों से बात की, लेकिन डीएमओ डा. सत्यप्रकाश ने इस पर खुलकर अपनी बात रखी।
भ्रामक मैसेज करते हैं नुकसान
डा. सत्यप्रकाश का कहना था कि इस तरह के झूठे और भ्रामक मैसेजों को सच मानने वाले नुकसान उठाते हैं, क्योंकि इन मैसेज में कोई सत्यता नहीं होती। आजकल सभी सरकारी जीओ साइट पर आते हैं, उनमें किसी अधिकारी के साइन भी नहीं होते। इस कारण ऐसे जीओ को फर्जी बनाने के लिए किसी खास चीज की आवश्यक्ता नहीं होती है। कई बार अवकाश के फर्जी मैसेज आने से कर्मचारी अवकाश लेकर घर बैठ जाते हैं। जिससे उनकी अनुपस्थिति दर्ज हो जाती है।
भ्रामक मैसेज पर रोक और हो कार्रवाई
'पत्रिका' ने रियल्टी चेक में कई अन्य लोगों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि गजेटेड अवकाश से अलग अन्य पर्वों को लेकर एक दिन पहले से गलत मैसेज आने लगते हैं। इन पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। इससे लोगों को नुकसान उठाना पड़ता है। इन्होंने कहा कि ऐसे भ्रामक मैसेजों की जांच जरूरी है। इसके लिए विभिन्न विभागों को अपने यहां विशेष निगरानी रखने की जरूरत है, ताकि इन गलत मैसेजों को रोका जा सके।