हर समय अकाल मृत्यु का भय सताता है तो आज नरक चतुर्दशी पर इन कामों को करने से अकाल मृत्यु का भय नहीं सताएगा। नरक चतुर्दशी उपाय करने से यमराज भी दूर रहेंगे।
Narak Chaturdashi 2023: छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी या नरक चौदस के रूप में मनाया जाता है। आज 11 नवंबर को नरक चतुर्दशी मनाई जा रही है। अगर अकाल मृत्यु का भय सताता है। ऐसा लगता है कि कभी भी मृत्यु हो जाएगी या हमेशा मृत्यु के विचार मन में आते रहते हैं तो आज नरक चतुर्दशी के दिन किए इन उपायों से अकाल मृत्यु का भय खत्म होता है। इसी के साथ मृत्यु का विचार जो मन में आता है वह खत्म होता है। अकाल मृत्यु होने वाली हो और नरक चतुर्दशी उपायों को किया जाए तो अकाल मृत्यु की संभावना खत्म होती है। यानी नरक चतुर्दशी पर किए उपायों से यमराज भी डरते हैं। ऐसे लोगों से यमराज भी दूर भाागते हैं।
पितृगण वापस परलोक लौट रहे होते हैं
हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता है कि पितृपक्ष के दिनों में धरती लोक पर आए पितृगण वापस परलोक लौट रहे होते हैं। माना जाता है कि नरक चतुर्दशी के दिन सुबह स्नान करके यमराज पूजा और संध्या के समय दीप दान करने से नर्क यातनाओं से मुक्ति मिलती है। अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है।
नरक चतुर्दशी के दिन पूजा
दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके एक चौमुखा दीपक और सोलह छोटे दीपक जलाकर थाली में रखें। पूजा स्थल को साफ करें और माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश को धूप, पुष्प, अक्षत, दीप, फल आदि अर्पित करें। इसके बाद कार्यस्थल की पूजा करें। नरक चतुर्दशी के दिन एक पात्र में तिल वाला जल भरें और दक्षिण दिशा की तरफ मुँह करके यमराज का तर्पण करें।
सुबह उठकर तेल-मालिश करने का विधान
शाम के समय यमराज के लिए दीपदान करें। माना जाता है कि ऐसा करने से अकाल मृत्यु का भय खत्म होता है। नरक चतुर्दशी के दिन किसी भी समय चतुर्मुखी दीपक जताया जा सकता है। नरक चतुर्दशी के दिन सुबह उठकर तेल-मालिश करने का विधान है।