प्रत्येक साल यह गैंग करता है यह काम, पुलिस-प्रशासन ने नहीं उठाया कोर्इ कदम
केपी त्रिपाठी, मेरठ। घटना 2012 अक्टूबर की है। दीपावली के आसपास का समय था और बच्चा कब्रिस्तान से एक-एक कर चार नवजातों के शव उनकी कब्र से गायब हो गए। पहले तो लोगों ने इसको किसी जानवर की हरकत समझी, लेेकिन जब एक-एक करके चार शव गायब हुए तो लोगों ने इसकी जांच-पड़ताल करनी शुरू की। जबकि पुलिस घटना को किसी आदमखोर कुत्ते से जोड़कर देख रही थी। मामला कुत्ते से न जुड़ा होकर मेरठ के तांत्रिकों जुड़ा निकला। जिन्होंने तंत्र क्रिया करने के लिए बच्चों के शव को कब्र से बाहर निकाला था। महानगर में फैलता तांत्रिकों का जाल बच्चा कब्रिस्तान से बच्चों के शव गायब होने की घटनाएं कुछ अजीबो-गरीब हैं। सप्ताह भर में कब्रिस्तान से गायब चार शव गायब हो चुके हैं। उधर मृतक बच्चों के परिजनों का आरोप था कि तंत्र मंत्र की विद्या में लीन तांत्रिक ऐसी क्रिया के लिए शव गायब किए गए हैं। वहीं एक संदेह है कि इन शवों को किसी और इस्तेमाल में न लिया जा रहा हो। 2012 की इस घटना में तात्रिकों के घटना को अंजाम देने की पुष्टि तब हो गई जब लोगों ने एक व्यक्ति को कब्र खोदते देखा तो उन्होंने उसे वहीं दबोच लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। पूछताछ में उसने बताया कि वह तंत्र मंत्र का काम करता है और उसकी क्रिया के लिए उसने बच्चे के शव को खोदकर निकाला था। पत्रिका ने कुछ ऐसे लोगों से बात की जिनके बच्चों की मृत्यु हुई और शव को दफनाने के बाद उनके शवों को गायब कर दिया गया।
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2012 की घटना पर इन्होंने यह कहा
किदवई नगर के रहने वाले मेहताब ने बताया कि नवंबर 2012 में उनकी नवजात बच्ची का शव नौचंदी मैदान स्थित बाले मियां कब्रिस्तान में दफनाया गया था। दूसरे दिन शुक्रवार था और उस दिन सुबह जब हम बच्ची के शव पर फातिया पढ़ने के लिए पहुंचे तो वहां कब्र से शव गायब था। हमने हंगामा किया इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने बिना जांच पड़ताल के कह दिया कि यह काम आदमखोर कुत्तों का है न कि किसी तांत्रिक का। जरा सोचो यह काम अगर कुत्तों का होता तो कब्र के आसपास कुछ अवशेष जरूर मिलते। अगर यह काम कुत्तों का न होकर किसी तंत्र-मंत्र क्रिया में लिप्त व्यक्ति ने किया हो या किसी अन्य उपयोग में लाया जा रहा हो। उन्होंने कहा कि कुछ कारण है जो ऐसा सोचने में मजबूर करते रहे हैं।
2018 में होली पर भी गायब हुए शव
बात 2018 के वर्ष में अधिक पुरानी नहीं है। बीती मार्च के आसपास भी दफनाए गए बच्चों के शव गायब हुए थे। उस समय होली का मौसम था। लोगों का कहना है कि आखिर बच्चों के शव होली और दीपावली के आसपास ही क्यों गायब होते हैं। हापुड अड्डा पीर वाली गली में रहने वाले सिराजुद्दीन के बच्चे का शव मोहनपुरी कब्रिस्तान से मार्च में गायब हुआ था। वह भी बच्चे के शव दफनाने के दूसरे दिन शबीना पढ़ने गया था, लेकिन शव की मिट्टी गीली देख उसे कुछ शक हुआ जब कब्र खुदवाई तो बच्चे का शव गायब था। उसका कहना है कि अगर कुत्ता या कोई जानवर शव को निकालता तो वह इतनी सफाई से कब्र को पहले जैसा करने की जहमत नहीं उठाता। शव को घसीटने का निशान भी कहीं नहीं दिखा। उसका कहना था कि कुत्तों ने इन्हें निकाला है तो आसपास इनके अवशेष पाए जाने चाहिए थे क्योंकि कुुत्ता शव को नोचने के बाद वहीं छोड़ देता है। सिराजुद्दीन के अनुसार बच्चों के शवों की चोरी किसी तांत्रिक द्वारा ही की जा जाती रही है।
कब्रिस्तान के पास एजेंट
मेरठ में बच्चों के करीब चार कब्रिस्तान है। इसके आसपास रहने वालों की माने तो इन कब्रिस्तान में तांत्रिकों ने अपने ऐेसे एजेंट छोड रखे हैं जो बच्चों के शवों को चोरी कर इन तांत्रिकों को सौंप देते हैं। जिसका तांत्रिक इन्हें पैसा भी देते हैं थोड़े से पैसों के लालच में लोग कब्र से मासूमों का शव निकालकर बेच देते हैं।
तंत्र क्रिया के लिए होता है इस्तेमाल
बच्चों के शव को इस्तेमाल तंत्र क्रिया के लिए किया जाता है। मेरठ में तांत्रिकों का संजाल फैला हुआ है। पुलिस सूत्रों के अनुसार मेरठ के लिसाडी गेट में ही करीब 500 तांत्रिक निवास करते हैं जो तंत्र क्रिया का काम करते हैं। होली और दीपावली के मौके पर ये लोग तंत्र क्रिया सिद्धि के लिए कब्रिस्तान से बच्चों के शव को उनकी कब्र से निकलवाकर उससे तंत्र सिद्धी करते हैं। एडवोकेट शाहिन परवेज कहती है कि इसके लिए वे कई बार प्रशासन को पत्र लिख चुकी है कि इन दोनों त्यौहारों के मौके पर बाल कब्रिस्तान की सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात की जाए, लेकिन पुलिस विभाग इस तरफ कोई ध्यान नहीं देता। उनका कहना है कि इसी कारण शायद ऐसे लोगों के हौसले बुलंद हैं। वहीं दीपावली नजदीक आते ही बाल कब्रिस्तान के नजदीक ऐसे लोगों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। जो बच्चों के शव को कब्र से निकालकर उनके साथ तंत्र क्रिया करते हैं।