मेरठ

राज्यपाल ने कहा- गुजरात के माडल को अपनाएं किसान, कृषि वैज्ञानिकों और छात्रों से किया ये आह्वान, देखें वीडियो

Highlights कृषि विवि के दीक्षांत समारोह में किया छात्रों और किसानों को संबोधित रसायन खाद और कीटनाशकों के प्रयोग को कम करने की सलाह पर्यावरण की सुरक्षा के लिए पालिथीन का प्रयोग नहीं करने का आह्वान      

3 min read
Sep 16, 2019

मेरठ। मेरठ के मोदीपुरम स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के हाथों मेडल और पदक पाकर छात्रों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अपने तय समय से करीब 30 मिनट देरी से पहुंची राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का कृषि विश्वविद्यालय में जोरदार स्वागत किया गया। समारोह में उन्होंने कहा कि मेरठ का यह कृषि विश्वविद्यालय देश के श्रेष्ठ विश्वविद्यालय में शुमार है। यह देश में 15 वें नंबर पर है। उन्होंने कहा कि इस विवि के छात्रों को कड़ी प्रतिस्पर्धा में शामिल होना है और देश में पहले नंबर पर आना है।

इस दौरान उन्होंने छात्रों से आहवान किया कि वे पर्यावरण की सुरक्षा के लिए पालीथिन का प्रयोग पूरी तरह से बंद करवाएं। न तो खुद प्रयोग करें और न ही किसी और को करने दें। राज्यपाल ने अपने संबोधन में सामाजिक और वर्तमान समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया।इस दौरान राज्यपाल ने कार्यक्रम में मौजूद किसानों से आह्वान किया कि वे खेतों में रसायन खाद का प्रयोग बिल्कुल बंद कर दें। उन्होंने कहा कि रसायनिक खाद खेत को बंजर बना रहे हैं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हम पॉलीथिन का प्रयोग भी बंद कर दे तो बेहतर होगा। मेरठ के लोगों से अपील की कि वह पॉलीथिन का उपयोग बिल्कुल भी न करें।

राज्यपाल ने आधा गिलास पानी को भी अपने आदत में शुमार करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि हम में से बहुत से लोग पूरा गिलास पानी और प्लेटभर कर खाना लेते हैं। फिर आधा फेंक देते हैं। यह प्रवृति बदलने की जरूरत है। भारत में बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिन्हें एक समय का भोजन नहीं मिल पाता है। हमको समाज के ऐसे लोगों का भी ध्यान रखना होगा।

राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने मेरठ के किसानों से गुजरात मॉडल अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने किसानों से कहा कि वे वह फसलों के बचे अवशेष को खेत में न जलाएं। इसके साथ ही कृषि वैज्ञानिकों और कृषि के छात्रों से आह्वान किया कि वे कोई ऐसी तकनीक इजाद करें जिससे इस बचे अवशेष से खाद बनाई जा सके। उन्होंने कहा कि टीबी रोग के खिलाफ अभियान शुरू किया गया है। कृषि विवि को टीबी पीडि़त बच्चों को गोद लेने चाहिए।

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राज्यपाल ने कहा कि देश में वर्ष 2025 तक टीबी के समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। यह लक्ष्य हर हालात में हमको प्राप्त कर लेना है। उन्होंने गुजरात मॉडल पर मेरठ में भी किसानों के लिए साप्ताहिक बाजार बनाने का सुझाव दिया। जहां आर्गेनिक उत्पाद बेचा जा सके। उन्होंने कहा कि आज आर्गेनिक उत्पाद की डिमांड अधिक बढी है। इसमें बीमारी रोकने की भी शक्ति होती है। मेरठ के किसानों को इस ओर ध्यान देना चाहिए। वे गुजरात के इस मॉडल को अपनाएं तो उनकी आय के साथ ही कृषि से जुड़ी हुई परेशानियां भी कम होगी।

Updated on:
16 Sept 2019 08:03 pm
Published on:
16 Sept 2019 05:25 pm
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