होलिका दहन के बाद अब दुल्हैंडी की तैयारी, मस्ती के रंग में रंगा शहर
मेरठ। मेरठ में होलिका दहन के मौके पर जमकर हुड़दंग मचा। यहां टोलियों के साथ युवकों की टोलियां पहुंची। बच्चे, युवती, महिलाएं आैर बुजुर्गों के साथ हाेलिका दहन किया गया। जमकर अबीर-गुलाल उड़ा। भगवा रंग इस बार लोगों को खूब भाया। भगवा रंग माथे पर लगाने के साथ लोग एक-दूसरे के गले मिले। हाेलिका दहन भक्त प्रहलाद की जय के उद्घोष के साथ हुआ। जनपद में 600 से ज्यादा स्थानों पर होलिका दहन हुआ, लेकिन कुछ स्थानों को छोड़ दिया जाए, तो सभी स्थानों पर शुभ मुहूर्त पर नहीं, बल्कि अपनी-अपनी सुविधाआें के साथ होलिका दहन किया गया। डीजे के साथ युवकों ने टोलियां बनाकर होलिका दहन पर डांस किया, हालांकि कुछ जगह इनमें आपस में झड़पें भी हुर्इ, लेकिन मोहल्ले के बुजुर्गों ने समझा-बुझाकर इन्हें शांत किया आैर ये फिर जुट गए होली के हुड़दंग में।
मिश्रित आबादी में होलिका दहन
शहर के हिन्दू-मुस्लिम मिश्रित इलाकों में भी होलिका दहन हुर्इ। यहां मुस्लिमों ने भी होलिका दहन में पूरा साथ दिया आैर एक-दूसरे से गले लगकर हाेली की शुभकामनाएं दी। पंडित भारत ज्ञान भूषण के अनुसार लकड़ी जलाने से आग पैदा होती है और उसे पवित्र माना जाता है। आग में तप कर वस्तुएं शुद्ध हो जाती हैं। मनुष्य के लिए ऊष्मा का महत्वपूर्ण स्रोत भी आग ही है। हमारे महत्वपूर्ण धार्मिक कार्यों में अग्नि को साक्षी बनाया जाता है। जल और अग्नि को साक्षी मानकर संकल्प लिए जाते हैं। हिंदू धर्म में विवाह भी अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करने के बाद ही संपन्न होता है। उन्होंने बताया कि होलिका दहन बहुत पवित्र त्योहार है, साथ ही यह भार्इचारे का संदेश भी देती है।