Holi 2022 देश में जितने त्यौहार हैं उनकी परंपराएं भी उतने ही प्रकार की होती हैं। होली को लेकर कहा जाता है कि इस पर्व में हर एक किमी में परंपरा बदल जाती है। चाहे वो होली पर रंग खेलने की परंपरा हो या फिर होलिका दहन या और किसी चीज से जुड़ी परंपरा हो। लेकिन एक ऐसी दिलचस्प परंपरा मेरठ के सराफा बाजार में होती है। जो कि महाराष्ट्र से मेरठ में आई है। यह परंपरा है गधे पर दामाद को बैठाकर रंग लगाने की।
Holi 2022 मस्ती-हंसी ठिठौली वाली परंपराओं से जुड़े रंगों के इस त्योहार में यह परंपरा बड़े ही सलीके के साथ दामाद के साथ मनाई जाती है। इसमें खूब हर्ष और उल्लास किया जाता है। मेरठ के सराफा बाजार में स्वर्ण आभूषण बनाने वाले हजारों कारीगर हैं जो कि महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। महाराष्ट्र के ये स्वर्ण आभूषण कारीगर होली हो या फिर गणेश चतुर्थी सभी त्योहारों को अपने परंपरागत तरीके से मनाते हैं। महाराष्ट्र के बीड इलाके भी कुछ लोग यहां हैं जो कि सोने के जेवर बनाने का काम करते हैं। उनमें से एक हैं राजेश सालवरकर।
राजेश महाराष्ट्र के बीड से हैं वे ही नहीं यहां पर उनके इलाके के करीब 300 लोग अपने परिवार और संबंधियों के साथ रहते हैं। ऐसे में इस परिवार की बेटियां भी अपने पति के साथ होली मनाने के लिए मेरठ में अपने परिजनों के पास आती हैं। राजेश बताते हैं कि जब उनके परिवार और संबंधियों के यहां पर होली पर दामाद ससुराल आता है तो उसको गधे पर बैठाया जाता है और रंग लगाया जाता है। उन्होंने बताया कि यह परंपरा उनके बीड इलाके में होती है जो जो कि वे यहां पर भी निभाते हैं।
इस दिन ससुराल आए दामाद को गधे पर बिठाकर रंग लगाया जाता है। इसके बाद दामाद को गधे से उतारकर उसकी आरती उतारी जाती है और स्वर्ण आभूषण दिया जाता है। मिठाई खिलाई जाती है। राजेश का कहना है कि पिछले तीन चार से ऐसा हो रहा है जबकि किसी न किसी संबंधी के घर दामाद आता है तो उसको गधे पर बैठाया जाता है। गधे का इंतजाम उनको पहले से करना होता है। अपने क्षेत्र की इस परंपरा को होली के मौके पर निभाने में वो कोई कसर नहीं छोड़ते। इस दौरान ससुराल आए जीजा के साथ सालियों ने भी जमकर होली खेली।