बच्चे हों या बड़े डरते हैं यहां से गुजरते हुए
मेरठ। मेरठ कैंट के जीपी ब्लाॅक का खौफ देश में ही नहीं विदेश में भी है। देश की टाॅप-10 डरावनी जगहों में शुमार जीपी ब्लाॅक के पास से गुजरते हुए आज भी बच्चे-बड़े 'भूत बंगला' कहकर डर जाते हैं। 70 दशक के अाखिर से वीरान हो चुके जीपी ब्लाॅक पर अब बाहर से ताला लटका है। कैंट की माल रोड से 50 मीटर हटकर इस कोठी के आसपास के स्कूलों के बच्चे जीपी ब्लाॅक का नाम लेकर यहां भूत होने की बात कहकर डरकर इधर से नहीं गुजरते। आसपास के लोग बताते हैं कि रात के समय यहां हाथ में मोमबत्ती लिए लाल साड़ी पहने एक महिला अक्सर घूमती देखी जाती थी, जो कभी बंगले के बाहर, कभी बंगले की छत पर दिखार्इ थी। साथ ही चार युवकों के साये इस बंगले के हाॅल में बैठे शराब पीते भी दिखते थे। एेसा सुनने के बाद लोगों ने इसके पास से गुजरना छोड़ दिया था। आज भी यही स्थिति बनी हुर्इ है।
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'भूत बंगला' कभी था ब्रिगेड कमांड आफिस
कैंट बोर्ड के रिकार्ड में माल रोड पर कोठी आेल्ड ग्रांट बंगला दर्ज है आैर जवाहर लाल मथुरा प्रसाद के नाम है। बंगला नंबर 111 A, B, C, D माल रोड पर व्हीलर्स क्लब के ठीक बराबर में है। ब्रिटिश काल में 1890 में अंग्रेज सैन्य अफसरों ने इस बंगले की लोकेशन अच्छी देखते हुए यहां ब्रिगेड कमांड आफिस बना लिया था। उस समय इस बंगले का किराया 30 से 60 रुपये तक दिया गया। ब्रिटिश काल खत्म होने के बाद पश्चिम उत्तर प्रदेश सब-एरिया हेडक्वार्टर कंकरखेड़ा रोड पर बनने के बाद इस जीपी ब्लाॅक बंगले में वीरानी छा गर्इ थी। देश के स्वतंत्र होने के बाद इस बंगले को पांच साल तक स्टाेर की तरह उपयोग में लाया गया। इसके बाद यहां सैन्य अफसरों के आवास करीब 25 साल तक रहे, लेकिन जीपी ब्लाॅक बंगले का रखरखाव ठीक नहीं होने से सैन्य अफसर यहां रहने से परहेज करने लगे। 70 दशक के आखिर में जीपी ब्लाॅक वीरान खंडर में बदल गया।
फिर यह बन गया 'भूत बंगला'
इस बंगले के मालिक जवाहर लाल मथुरा प्रसाद ब्रिटिश काल खत्म होने के बाद रुड़की जाकर रहने लगे थे। बंगला खाली होने के बाद यहां कोर्इ रहना पसंद नहीं करता था, क्योंकि यहां खंडहर हो चुकी दीवारें, बंगले के अंदर बड़े-बड़े जाले, दीवारों से उगते पेड़, लंबी-लंबी झाड़ियां-झंकाड़ उग आयी थी। मालिक ने इसकी देखभाल के लिए यहां कुछ परिवारों को छोड़ दिया था।
लाल रंग की साड़ी पहने महिला
आसपास के लोग बताते हैं कि चौकादारी करने वाले परिवार के लोग अक्सर रात बारह बजे के आसपास लाल रंग की साड़ी पहने एक महिल को हाथ में मोमबत्ती लेकर घूमते देखने की बात कहते थे। वह कभी बंगले के बाहर झाड़ियों के आसपास तो कभी छत पर उन्हें दिखार्इ देती थी। इसके साथ-साथ बंगले के अंदर हाॅल में चार लड़कों के साये एक टेबिल पर बैठकर शराब पीते दिखार्इ पड़ते थे। पहले तो लोगों ने इस पर यकीन नहीं किया, लेकिन जब चौकीदारी करने वाले परिवार यहां से छोड़कर जाने लगे तो लाेगों ने 'भूत बंगला' कहना शुरू कर दिया। इसके पीछे क्या सच्चार्इ रही, कोर्इ कुछ भी कहने के लिए सामने नहीं आया।
लोगों ने यहां से गुजरना छोड़ दिया
इस बंगले से चौकीदारों के जाने के बाद यहां मालिक ने बाहर के गेट का ताला लगवा दिया, लेकिन जीपी ब्लाॅक बंगला पहले से ज्यादा डरावना हो गया है। लोग रात में यहां से कम गुजरते हैं, बच्चेे दिन में भी यहां से निकलते डरते हैं। इसमें बड़े-बड़े पेड़, दीवारें बहुत खंडहर हो चुकी हैं। जीपी ब्लाॅक को लोग माल रोड पर भूत बंगला कहकर बुलाते हैं। कैंट बोर्ड के प्रवक्ता एमए जफर का कहना है कि जीपी ब्लाॅक को लेकर कर्इ तरह चर्चाएं रही, लेकिन किसी ने सामने आकर कुछ नहीं कहा। इसलिए कुछ नहीं कहा जा सकता। बंगला कर्इ वर्षों से बंद है। इसलिए लोगों में इन चर्चाआें से मन में डर बैठा हुआ है।