
Meerut Drug Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं के प्रदर्शनों के बीच अब उत्तर प्रदेश में बच्चों की आवाज भी सड़क पर सुनाई देने लगी है। मेरठ के सरधना में रविवार को 12-13 साल के बच्चों ने महिलाओं के साथ मिलकर नशे के खिलाफ प्रदर्शन किया। हाथों में पोस्टर और तख्तियां लेकर बच्चे सरधना थाने पहुंचे और पुलिस से इलाके में कथित तौर पर चल रहे नशीले पदार्थों के कारोबार पर रोक लगाने की मांग की।
इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि बच्चों ने अपनी शिकायत को लेकर सिर्फ बड़ों का सहारा नहीं लिया, बल्कि खुद सामने आकर अपनी बात पुलिस के सामने रखी। प्रदर्शन में स्थानीय महिलाएं भी बच्चों के साथ मौजूद रहीं।
सरधना के मोहल्ला खेवान के रहने वाले लोगों का आरोप है कि इलाके में लंबे समय से अवैध शराब, गांजा, सुल्फा और दूसरे नशीले पदार्थों की बिक्री हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस संबंध में पहले भी शिकायतें की गईं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। रविवार को जब बच्चों और महिलाओं ने थाने का रुख किया तो उनके हाथों में ऐसे पोस्टर थे, जिन पर ‘हमारा भविष्य बचाइए’ और ‘नशे पर रोक लगाइए’ जैसे संदेश लिखे थे। बच्चों ने पुलिस से कहा कि उनके आसपास नशे का माहौल बढ़ना उनके भविष्य के लिए चिंता की बात है। महिलाओं ने भी कथित नशे के कारोबार पर सख्ती से रोक लगाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस प्रदर्शन के पीछे बच्चों की सुरक्षा और उनके आसपास के माहौल को लेकर बढ़ती चिंता है। लोगों का कहना है कि अगर मोहल्ले में खुले तौर पर नशीले पदार्थों की बिक्री होती है तो इसका असर सबसे पहले बच्चों और युवाओं पर पड़ सकता है। प्रदर्शन के बाद पुलिस ने लोगों को कार्रवाई का भरोसा दिया। अधिकारियों ने शिकायत को गंभीरता से लेने और मामले की जांच करने की बात कही है।
मेरठ से पहले फतेहपुर में भी स्कूली बच्चों का ऐसा ही प्रदर्शन चर्चा में आया था। 28 जुलाई को विजयीपुर के सर्वोदय इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने स्कूल की बुनियादी सुविधाओं को लेकर आवाज उठाई थी। बच्चों की शिकायत थी कि स्कूल में बिजली, पीने के पानी और शौचालय जैसी सुविधाओं की स्थिति ठीक नहीं है। छात्र हाथों में तिरंगा और बैनर लेकर कॉलेज के गेट पर कई घंटे तक प्रदर्शन करते रहे। बच्चों की संख्या और उनके बढ़ते विरोध को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। डीआईओएस ने छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की और उनकी आठ में से सात मांगों को लिखित तौर पर स्वीकार किया। इसके बाद छात्रों ने प्रदर्शन समाप्त किया। विज्ञान वर्ग की मान्यता से जुड़ी मांग को लेकर स्कूल प्रबंधन को आवेदन करने के निर्देश दिए गए थे।
मेरठ और फतेहपुर की घटनाओं को अलग-अलग स्थानीय मुद्दों के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन दोनों में एक बात समान नजर आती है, बच्चे अपनी समस्याओं को लेकर खुद आवाज उठा रहे हैं। एक जगह मुद्दा नशे से सुरक्षित माहौल का है तो दूसरी जगह स्कूल की बुनियादी सुविधाओं का। उम्र भले कम हो, लेकिन अपनी रोजमर्रा की परेशानियों को लेकर बच्चों का सीधे प्रशासन के सामने पहुंचना स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।