मेरठ

सरहद पार तक फैला मेरठ का अवैध नेटवर्क: ATS-पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 6 गिरफ्तार, मास्टरमाइंड फरार

Meerut News: मेरठ में एटीएस और पुलिस ने अवैध VOIP टेलीकॉम नेटवर्क का भंडाफोड़ कर 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह विदेशी कॉल्स को लोकल में बदलकर सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहा था, वहीं पाकिस्तान कनेक्शन की भी जांच जारी है।
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Mar 27, 2026
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सरहद पार तक फैला मेरठ का अवैध नेटवर्क..

Illegal voip network busted ATS Meerut: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक बड़े अवैध टेलीकॉम नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। एटीएस और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में सामने आया कि यह नेटवर्क विदेशी कॉल्स को भारतीय लोकल कॉल में बदलकर न सिर्फ सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा रहा था, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता था। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई हैं और हर पहलू की गहराई से जांच की जा रही है।

ATS और स्वॉट टीम की कार्रवाई

इस पूरे ऑपरेशन को मेरठ की स्वॉट टीम और एटीएस यूनिट ने मिलकर अंजाम दिया। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि लिसाड़ी गेट क्षेत्र में अवैध टेलीकॉम एक्सचेंज चल रहा है। इसके बाद टीम ने योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की और मौके से छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में फरदीन नाजिम उर्फ फुरकान, फहीम, सुल्तान, शादाब और रईस शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि गिरोह का मुख्य सरगना अभी फरार है और उसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।

विदेशी संपर्कों की जांच में जुटी एजेंसियां

जांच में यह सामने आया है कि इस नेटवर्क के तार पाकिस्तान सहित कई अन्य देशों से जुड़े हो सकते हैं। एसएसपी अविनाश पांडेय ने बताया कि इस तकनीक के जरिए कॉल की असली लोकेशन छिपाई जाती थी, जिससे कॉल ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता था। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में भी किया जा सकता था। अब जांच इस दिशा में भी आगे बढ़ रही है कि आरोपियों के संपर्क किन विदेशी तत्वों से थे और इसके पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है।

कैसे चलता था अवैध कॉलिंग का खेल

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे भोले-भाले लोगों के नाम पर सिम कार्ड हासिल करते थे और उन्हें VOIP GSM गेटवे मशीन में लगाते थे। इसके जरिए विदेश से आने वाली इंटरनेट कॉल्स को लोकल कॉल में बदला जाता था। इस प्रक्रिया से टेलीकॉम कंपनियों को मिलने वाला इंटरनेशनल चार्ज बचा लिया जाता था, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान होता था। साथ ही, कॉल रिसीव करने वाले को भारतीय नंबर दिखाई देता था, जिससे धोखाधड़ी और साइबर क्राइम की संभावना बढ़ जाती थी।

भारी मात्रा में उपकरण बरामद

छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी संख्या में सिम कार्ड, हाई-टेक राउटर, VOIP GSM गेटवे मशीनें और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। इन सभी डिवाइसेस को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नेटवर्क के जरिए अब तक कितनी कॉल्स की गईं और कितने लोग इसके शिकार हुए। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है।

देश विरोधी गतिविधियों पर जीरो टॉलरेंस नीति

एसएसपी ने स्पष्ट किया है कि देश की सुरक्षा और आर्थिक हितों से खिलवाड़ करने वाले किसी भी गिरोह को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही हैं। फरार मास्टरमाइंड की तलाश तेज कर दी गई है और उम्मीद है कि जल्द ही इस पूरे नेटवर्क का पूरी तरह सफाया कर दिया जाएगा।

Updated on:
27 Mar 2026 07:08 pm
Published on:
27 Mar 2026 07:08 pm