चार दिन में निगम की दूसरी बैठक, इस बार भी पार्षद आपस में भिड़ गए आैर जमकर हुआ हंगामा
मेरठ। पिछले साल दिसंबर में जब नगर निगम चुनाव हुए थे, तो लोगों ने अपने-अपने वार्ड के उम्मीदवारों को इसलिए जिताया था कि उनकी समस्याएं नगर निगम के सदन में उठेंगे आैर बेहतर फैसले के साथ उनके काम होंगे, लेकिन पार्षद हर बैठक को अखाड़ा बना देते हैं। दिसंबर से अब तक पांच बैठकें हुर्इ हैं, लेकिन कोर्इ भी बैठक अभी तक पूरी नहीं हुर्इ है। हर बैठक के शुरू में कोर्इ न कोर्इ एेसा मुद्दा उछाल दिया जाता है कि भाजपा, बसपा, सपा आैर कांग्रेस पार्टी के पार्षद आपस में भिड़ जाते हैं आैर फिर लात-घूंसे व एक-दूसरे के कपड़े फाड़ स्पर्द्धा होती है। बैठक बेनतीजा समाप्त होती है। शनिवार को हुर्इ बैठक में भी एेसा ही हुआ। चार दिन में एेसा दूसरी बार हुआ।
पार्षदों में हुर्इ जमकर मारपीट
टाउन हाल में हुर्इ मेरठ नगर निगम की बैठक आज एक बार फिर हंगामे की भेंट चढ़ गर्इ। बैठक में प्रस्ताव को लेकर बसपा और भाजपा के पार्षद आपस में भिड़ गए। दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हुई। सदन में हंगामे के बीच मेयर सुनीता वर्मा उठ कर चली गई, जिसके बाद नगर निगम कर्मचारी ने भी पार्षदों को अपशब्द कहे। इस मामले में सदन में तूल पकड़ लिया और पार्षदों ने कर्मचारी के खिलाफ जमकर हंगामा किया।
निर्दलीय पार्षद अर्धनग्न बैठ गया
इस हंगामे और मारपीट के दौर के बीच एक खास बात यह रही कि एक निर्दलीय पार्षद अर्धनग्न होकर सदन की जमीन पर ही बैठ गया। पार्षद की मानें तो जनता विकास के लिए तरस रही है। बजट सत्र पर चर्चा करने के लिए दो बार सदन बुलाया जा चुका है, लेकिन सिवाय हंगामे के यहां पर कुछ नहीं होता। ऐसे में जनता को क्या बताएंगे। उन्होंने कहा कि अखबारों में राजनीति के लिए पार्षद हंगामा करते हैं।
सदन में बुलानी पड़ी पुलिस
आपको बता दें कि मेरठ के नगर निगम की बोर्ड बैठक आज बुलाई गई थी, जिसमें बजट समेत कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को लेकर चर्चा की जानी थी, लेकिन जैसे ही सदन शुरू हुआ तभी प्रस्तावों को लेकर बसपा और भाजपा पार्षदों में ठन गई और माहौल हंगामे में तब्दील हो गया। पुलिस मौके पर पहुंच गर्इ आैर मामला शांत कराया। इस तरह सदन में बजट को लेकर कोई चर्चा नहीं हो सकी।