मेरठ

Mission 2019: भाजपा इस वर्ग को आरक्षण देने के लिए खेलने जा रही यह दाव, जानिए क्यों बन रही मजबूरी!

मिशन 2019 को लेकर सभी राजनीतिक दलों में मुद्दों को लेकर चल रही कशमकश  
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Updated: 20 Sep 2018, 6:02 PM IST
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मेरठ। जाट आरक्षण की फड़फड़ा रही लौ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान ने घी का काम किया है। उनके बयान के बाद जाट आरक्षण को लेकर राजनीति तेज हो गई है। जाट आरक्षण को लेकर वर्ष 2014 से ही उप्र में आंदोलन होते रहे हैं। उप्र में जाट बेल्ट कही जाने वाली पश्चिम उप्र के 17 जिले इस बिरादरी से प्रभावित होते हैं। पश्चिम उप्र के जिलों की सीमाएं हरियाणा राज्य से मिली होने के कारण जाट बाहुल्य इस राज्य जाट समाज का भी उप्र के जाटों को समर्थन मिलता रहा। भाजपा सरकार ने मई 2018 में जाट आरक्षण को लेकर एक कमेटी का गठन किया था। जिसमें अभी तक कमेटी की रिपोर्ट नहीं आई है, लेकिन इतना तय है कि भाजपा लोकसभा चुनाव 2019 से पहले जाट आरक्षण को लेकर कोई न कोई राजनैतिक दाव जरूर खेलेगी। उप्र की करीब 17 लोकसभा सीटें इस बिरादरी की वोटों से प्रभावित होती है।

'जाटों काे आरक्षण देना भाजपा की मजबूरी'

जाट आरक्षण संघर्ष समिति के यशपाल मलिक कहते हैं कि जाटों को आरक्षण देना सरकार की मजबूरी है। चूंकि आरक्षण की मांग काफी समय से चली आ रही है और इसकी अनदेखी केंद्र और प्रदेश सरकारें अपने स्तर से करती रही हैं, लेकिन अब अनदेखी नहीं हो सकती। उन्होंने कहा पहले केंद्र में अलग दल और प्रदेश में अलग दल की सरकारें होती थी। जिसका लाभ दोनों सरकारें उठाती थी और आरक्षण की गेंद एक-दूसरे के पाले में फेंकते रहते थे, लेकिन भाजपा अब ऐसा नहीं कर सकती। इस समय तो केंद्र में भी भाजपा है और प्रदेश में भी। फिर भाजपा ऐसे में किसे दोषी ठहरा सकती है। इसलिए जाटों को आरक्षण देना केंद्र और प्रदेश सरकार दोनों की मजबूरी है।

क्या है जाट आरक्षण

हरियाणा में 2014 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुड्डा सरकार ने जाट और अन्य चार जातियों को विशेष रूप से पिछड़ी जातियों में शामिल किया था, लेकिन पिछले साल पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने जाटों को 10 फीसदी आरक्षण देने के सरकार की सिफारिश को खारिज कर दिया। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने नौ राज्यों के जाटों को ओबीसी कोटे में आरक्षण देने की मांग ठुकरा दी थी। जिनमें से यूपी भी था। इस आंदोलन में कोई साफ नेतृत्व नहीं दिख रहा था और न ही कोई सरकार की ओर से समाधान के लिए ही कोई नेतृत्व करता दिखाई दे रहा था, लेकिन भाजपा सरकार आने के बाद आदालत के फैसले पर अमल करते हुए इसकी आवश्यकता परखने के लिए कमेटी का गठन कर दिया गया। अब कमेटी की रिपोर्ट पर ही जाट आरक्षण का भविष्य टिका हुआ है, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद जाटों में उम्मीद जगी है कि उन्हें आरक्षण मिलकर रहेगा।

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