मेरठ

भाजपा की जनसभा में CM योगी की तस्वीर लिए इस तरह दिखी बुर्के में औरतें, जानिए कौन हैं यह महिलाएं

मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में योगी की सभाओं में मुस्लिम महिलाएं पहुंचकर योगी जिंदा बाद के नारे लगा रही है।

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Nov 19, 2017

मेरठ. निकाय चुनाव नजदीक आते ही चुनाव प्रचार की कमान इस बार भी खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथों में ले ली है। हैरानी की बात है यह है कि मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में योगी की सभाओं में मुस्लिम महिलाएं पहुंचकर योगी जिंदा बाद के नारे लगा रही है। योगी को हिन्दुत्व के कट्टरतावादी चेहरे के नाम से जाना जाता है। लेकिन इस बार हलात बदले-बदले नजर आ रहे हैं। योगी की रैली में मुस्लिम महिलाएं योगी की तस्वीर हाथों में लिए योगी जिंदाबाद के नारे लगाती देखी जा रही हैं। दरअसल, भाजपा ने मेरठ निकाय चुनाव में 9 मुस्लिम युवाओं को पार्षद का टिकट दिया है, इनमें से तीन महिलाएं हैं। इसके अलावा एक टिकट शाहजहांपुर चेयरमैन पद के उम्मीदवार को दिया है।

आरएसएस के जानकार सूत्रों की माने तो सक्रिय या अस्थायी स्वयंसेवकों के तौर पर मेरठ और पश्चिम उप्र के विभिन्न क्षेत्रों में करीब 500 मुस्लिम युवा काम कर रहे हैं। इसके अलावा पेशेवर अनुभव रखने वाले युवक भी संगठन से जुड़ने के लिए संपर्क में हैं। आरएसएस के एक पदाधिकारी कृपा शंकर ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोग भी आरएसएस से जुड़ना चाहते हैं और उसके लिए सक्रिय रूप से काम करना चाहते हैं। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद से हिन्दू वोटों का एकीकरण और मुस्लिम वोटों का जबरदस्त धु्रवीकरण हुआ। मुस्लिम वोटों पर सेंधमारी के कारण कई राजनैतिक दलों का विधानसभा चुनाव में पश्चिम उप्र में पतन सा हो गया। इनमें बसपा का नाम प्रमुख रूप से शामिल है। समाजवादी पार्टी को भी अधिक सफलता नहीं मिल पाई। शहर काजी जैनुसार्जिद्दीन के अनुसार अब मुस्लिम कौम भी पढी-लिखी जमात में शामिल हो गई है। वह भी अपना भला बुरा सोचने लगी है। यहीं कारण है कि अब मुस्लिम वोटर अपना और समाज का हित देखकर ही वोट दे रहा है फिर चाहे वह पार्टी भाजपा ही क्यों न हो। बताया जाता है कि पिछले छह महीने के दौरान मेरठ में ही अधिकांश मुस्लिम महिलाओं ने भाजपा से जुड़ने के लिए संपर्क किया था। माना जा रहा है कि क्षेत्र में मुस्लिम महिलाओं के बीच योगी की छवि कुछ अलग ही बन रही है।

2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान उप्र में भाजपा के प्रचार अभियान की शुरुआत भी मुजफ्फरनगर से हुआ और निकाय चुनाव का भी। इसे मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी का वर्किंग स्टाइल कहे या आरएसएस की कैंपेनिंग का असर। बताया जाता है कि दोनों ही चुनाव में आरएसएस की कैंपेनिंग आगे चल रही थी और उसके पीछे योगी अपनी वर्किंग स्टाइल से चुनाव प्रचार में जुटे हुए थे। भाजपा में एक अकेले योगी ही थे, जिनके हाथ में चुनाव प्रचार सबसे पहले शुरू करने की कमान थी। वह भी पश्चिम उप्र से, जिसके परिणाम भाजपा और देश के सामने हैं। कुछ ऐसा ही इस बार निकाय चुनाव में हो रहा है।

Published on:
19 Nov 2017 06:51 pm
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