जिले के किठौर क्षेत्र के गांव राधना में एनआईए ने फिर से छापेमारी की। एनआईए की छापेमारी गुपचुप तरीके से तड़के शुरू हुई। हैरानी की बात एनआईए की छापेमारी की जानकारी थाना पुलिस को भी नहीं हो पाई।
मेरठ. उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद के हथियार तस्करों इस समय एनआईए के निशाने में पर हैं। तीन साल में दूसरी बार मेरठ के किठौर क्षेत्र के गांव राधना में एनआईए की टीम ने छापेमारी की। मंगलवार की सुबह किठौर के राधना में एमआईए की टीम चंडीगढ़ पुलिस के साथ पहुंची। इस दौरान टीम ने कई घंटे तक कुछ घरों में तलाशी अभियान चलाया। टीम ने छापेमारी में एक लाख रुपये और कुछ सिम कार्ड कब्जे में लिए है। एनआईए की छापेमारी के बाद से गांव में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है।
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गहनता से की जांच
बता दें कि किठौर के राधना में मंगलवार की सुबह एनआईए और चंडीगढ़ पुलिस ने छापेमारी की। सुबह लगभग साढ़े चार बजे राधना गांव में जलीस व खिलाफत के घर लगभग चार-चार गाड़ियों में एनआईए और चंडीगढ पुलिस के अधिकारी और जवान पहुंचे। फोर्स ने दोनों के अलग-अलग घरों में एक साथ दबिश दी। कार्रवाई के दौरान टीम ने घर मे हथियार रखे होने के बारे में पूछते हुए घरों में रखे सामान की गहनता से जांच की गई है।
जलीस और खिलाफत के बारे में जानकारी जुटाई
बताया गया कि एक घर से टीम ने एक लाख बीस हजार रुपए, कई मोबाइल सिम कब्जे में लिए गए है। छापेमारी के दौरान टीम ने घर के किसी भी सदस्य को बाहर नहीं जाने दिया। सभी के मोबाइल भी कब्जे में ले लिए। छापेमारी के दौरान जलीस और खिलाफत के बारे में जानकारी की। क्योंकि दोनों ही घर नहीं मिले। टीम ने घर में रखे सभी सामान की गहनता के साथ जांच की।
हथियार सप्लायर बताए जा रहे है जलीस और खिलाफत
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार खिलाफत के बेटे सोनी के बारे में भी टीम ने पूछताछ की। बताया जा रहा है कि सोनी पर चंडीगढ़ व अन्य प्रदेशों में कई संगीन मामले दर्ज है। वहीं जलीस और खिलाफत हथियार सप्लायर बताए जा रहे है। एनआईए की कार्रवाई से गांव में हड़कंप मच गया। इस छापेमारी में स्थानीय पुलिस को भी शामिल नहीं किया गया। इससे पूर्व में भी तीन साल पहले इसी गांव में एनआईए ने गुपचुप तरीके से छापेमारी की थी।