एससी-एसटी एक्ट पर भारत बंद पर भाजपाा सरकार पर लगाए ये आरोप
मेरठ। एससी-एसटी एक्ट के विरोध में सवर्ण संगठनों ने गुरुवार को भारत बंद आह्वान किया। इसके अंतर्गत में देश के कई प्रान्तों में भारत बंद किया गया हैै। राजस्थान और मप्र में भारत बंद का आह्वान करणी सेना द्वारा किया गया है। भारत बंद के इस आह्वान पर विपक्ष ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। विपक्षी पार्टियों का कहना है कि भारत बंद भाजपा सरकार की नाकामी है। सवर्ण संगठनों द्वारा आह्वान किए गए भारत बंद पर विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी हैं।
इतने बंद तो कांग्रेस के 40 साल में नहीं हुए
कांग्रेस के आरटीआई सेल के प्रदेश उपाध्यक्ष डा. संजीव अग्रवाल ने भारत बंद पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इतने भारत बंद तो कांग्रेस की 40 साल की सरकार में नहीं हुए, जितने आज भाजपा के चार साल के कार्यकाल में हुए हैं। भारत बंद प्रदेश और देश की सरकारी नीतियों की विफलता सिद्ध करता है। जो सरकार अपने देश के नागरिकों का विश्वास नहीं जीत सकी उसको और उसके प्रधानमंत्री को कुर्सी पर बना रहने का कोई हक नहीं है।
भाजपा सरकार हर मोर्चे पर विफलः रालोद
रालोद के राष्ट्रीय महासचिव डा. मैराजुद्दीन ने भारत बंद के मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि भाजपा सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है। सरकार और भाजपा देश में किसी भी वर्ग का विश्वास जीतने में सफल नहीं हो पाई। विकास के नाम पर हवाई दावे किए जा रहे हैं। पहले दलितों ने भारत बंद का आह्वान किया था, जब हिंसा हुई थी। अब सवर्ण द्वारा भारत बंद का भाजपा सरकार की नाकामी का प्रतीत है।
भाजपा ने देश को जातिवाद में बांट दियाः आप
आप के उप्र प्रभारी और सांसद संजय सिंह ने कहा कि भाजपा ने देश को जातिवाद में बांट दिया है। चार साल में भाजपा सरकार की उपलब्धियों पर चर्चा करें तो सिर्फ और सिर्फ धर्म और जाति के नाम पर देशवासियों के बांटने के अलावा और कुछ नहीं किया। भाजपा की केंद्र की सरकार हो या फिर राज्य की। आज हर वर्ग अपने को असुरक्षित महसूस कर रहा है। सरकार वो होती है जिसमें जनता अपने को सुरक्षित महसूस करें, लेकिन भाजपा सरकार में कहीं सांप्रदायिक दंगे हो रहे हैं तो कहीं जातिवाद के नाम पर देश में बंद का आह्वान किया जा रहा है। यह बंद भाजपा सरकार की नाकामी है।
बीच का रास्ता निकलती तो बन जाती बातः सपा
समाजवादी पार्टी सरकार में दर्जा प्राप्त मंत्री रहे डा. कुलदीप उज्जवल ने कहा कि केंद्र सरकार को इस मसले पर बीच का रास्ता निकालना चाहिए था। ये सही है कि सरकारें हर वर्ग को खुश नहीं रख सकती, लेकिन इसके लिए कोई रास्ता तो निकाला ही जा सकता है। भाजपा सरकार ने इसके लिए कोई प्रयास नहीं किए। बार-बार बंद का आह्वान सरकारी नीतियों की असफलता है। लोगों का विश्वास कहीं न कहीं भाजपा सरकार से खत्म हुआ है। निश्चित ही इसका परिणाम 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को देखने को मिलेगा।