Highlights - जुर्रानपुर गांव में शाम होते ही घरों में कैद हो जाते हैं ग्रामीण- बच्चों को भी घर से बाहर निकलने पर मनाही- मनोवैज्ञानिकों ने बताया नेकरोफोबिया
मेरठ. जिले के जुर्रानपुर गांव के आसपास काली छाया के डर से ग्रामीण दहशत में हैं। आलम ये है कि इस काली छाया के डर के कारण ग्रामीण शाम होते ही घरों में कैद हो जाते हैं। इतना ही नहीं बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलने दिया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि ये काली छाया गांव और बाहर बाइपास के अलावा आसपास के गांवों में घूमती रहती है। ग्रामीणों में इस काली छाया को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं।
बता दे कि जुर्रानपुर फाटक के पास स्थित एक गैराज है। इस गैराज में इरशाद नामक व्यक्ति काम करता था। बीती 20 जनवरी को इरशाद की गैराज के भीतर ही दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी। इसके कुछ दिन बाद जब गैराज में लगे सीसीटीवी कैमरे चेक किए जा रहे थे तो उसमें एक काली छाया दिखाई दी। दावा किया जा रहा है कि यह काली छाया मृतक इरशाद के पास घूम रही थी। उसके बाद ही इरशाद की मौत हुई थी। वहीं कुछ दिन से ग्रामीण भी काली छाया की बातें कर रहे थे, लेकिन किसी ने ग्रामीणों की बातों पर विश्वास नहीं किया। जब सीसीटीवी में काली छाया कैद हुई तो ग्रामीणों की बात और पुख्ता हो गई। काली छाया की अफवाह इलाके में फैल गई है। गांव जुर्रानपुर निवासी शंकर ने बताया कि गांव में काली छाया देखी जा रही है, जिस कारण गांव के लोगों में दहशत है। इसके चलते लोग अपने बच्चों को भी घरों से बाहर नहीं निकलने देते हैं।
इस संबंध में जब मनोवैज्ञानिक डाॅ. संजय कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि ऐसा अक्सर नेकरोफोबिया के कारण होता है। कुछ लोगों में वहम के कारण भी ऐसा होता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति के दिमाग में जो चल रहा होता है, उसको वह अपने सामने मानकर चलता है।