पुलिस को कुछ भी नहीं आ रहा समझ में
बागपत. छपरौली थाना के सिलाना गांव के मंदिर में शिवभक्त पुजारी की हत्या की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। मंदिर के पुजारी का शव मंदिर प्रांगण में ही खूटी पर लटकता हुआ मिला है। सुबह जब लोग मंदिर में पूजा करने के लिए पहुंचे तो पुजारी का शव खूटी पर टंगा हुआ देखकर सन्न रह गए। धीरे-धीरे ये खबर पूरे गांव में फैल गई। जिससे गांव में सनसनी फैल गई। इसके बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। सूचना के बाद मौके पर पहुंचकर पुलिस ने शव को पंचनामे के लिए भिजवाकर मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है। ग्रामीणों ने पुजारी की हत्या की अशंका जताई है। बताया जा रहा है कि पहले पुजारी की हत्या की गई और उसके बाद शव को खूंटी पर फंदा डालकर लटकाया गया, ताकि हत्या को आत्महत्या का रूप दिया जा सके ।
पिछले पांच सालों से मंदिर में भजन किर्तन कराने वाले पुजारी का शव मिलने से लोग हैरान है। पुजारी का नाम संदीप है। वह सिलाना गांव का का ही रहने वाला है। बताया जाता है कि वह पिछले पांच साल से घर और परिवार त्याग कर मंदिर में ही रहता था। गांव के लोग भी उसकी भगवान की भक्ति के कायल थे, लेकिन अब अचानक जब उसकी हत्या की खबर गांव में फैली तो लोगों को यकीन नहीं हुआ। जिसने पुजारी संदीप की हत्या की खबर सुनी वो अपने आप को रोक नहीं पाया और मंदिर पहुँचकर घटना की जानकारी ली।
घटना की खबर मिलते ही छपरौली पुलिस तत्काल मौके पर पहुँची और मामले की जानकारी ली। मामले की गंभीरता को देखते हुए शव को खूंटी से उतरवाकर पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया। हालांकि, घटना के बाद एएसपी बागपत मौके पर पहुँचे। उन्होंने लोगो से घटना के बारे में जानकारी जुटाई, लेकिन न तो कोई ठोस सबूत हाथ नहीं लगा और न ही अभी तक हत्या का कारण स्पष्ट हुआ है।
पुजारी की हत्या के बाद ग्रामिणो में दुख की लहर है
एक ग्रामीण ने बताया के पुजारी संदीप से पहले उनके पिता ने भी इसी शिव मंदिर में तपस्या की थी। पिता की मौत के बाद संदीप शिव मंदिर में तपस्या कर रहे थे। पिछले 5 साल से मंदिर में रहकर ही संदीप पूजा-पाठ और तपस्या किया करते थे। उनकी हत्या का बहुत अफसोस है और ये गांव के लिए भी शर्म की बात है। हालांकि, पुजारी कि किसी से भी गांव में दुश्मनी नही थी, लेकिन पुजारी की हत्या के पिछे कई सवाल है जिसके जवाब अभी पुलिस तलाश रही है, जिसका खुलासा हत्या से पर्दा उठने के बाद ही होगा। लेकिन ये पुलिसया कार्येशेली पर निर्भर करता है कि कब तक वह पुजारी के कातिलों को सलाखों के पीछे पहुचती है।