मेरठ

Sardhana Assembly Seat: सरधना विधानसभा में किसका चलेगा जोर? जानिए क्षेत्र के समीकरण और दावेदारी

UP Politics: यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए बसपा ने सरधना सीट पर विनीत भराला को प्रभारी बना दिया है। चुनाव में वे भाजपा के संगीत सोम और सपा के अतुल प्रधान के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।
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Aug 20, 2026
mayawati Sangeet Som
मायावती और संगीत सोम (फोटो एएनआई)

Uttar Pradesh Assembly Elections: पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मेरठ जिले की सरधना विधानसभा सीट आगामी चुनावों में सबसे चर्चित और रोमांचक सीटों में शामिल होने वाली है। भाजपा के पूर्व विधायक और फायरब्रांड नेता संगीत सोम यहां से दोबारा विधायक बनने की तैयारी में जुटे हैं, जबकि मौजूदा विधायक समाजवादी पार्टी के अतुल प्रधान मैदान में बने रहने को लगभग तय माने जा रहे हैं। इसी बीच बहुजन समाज पार्टी ने जाट कार्ड खेलते हुए विनीत भराला को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है। इससे सीट का पूरा सियासी समीकरण बदल गया है और मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।

जाट वोटरों पर बहुजन समाज पार्टी का दांव

बसपा ने वलीदपुर इलाके में जनसभा आयोजित कर विनीत भराला को आधिकारिक उम्मीदवार बनाया। विनीत का पूरा नाम विनीत चौधरी है। वे सरधना क्षेत्र के भराला गांव के निवासी हैं, इसलिए विनीत भराला के नाम से जाने जाते हैं। उनके पिता सत्यप्रकाश भराला समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता थे और दो बार चुनाव लड़ चुके थे। 2008 में उनकी हत्या के बाद विनीत राजनीति में सक्रिय हुए। वे सपा से टिकट की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन मौजूदा विधायक अतुल प्रधान के कारण संभावनाएं कम देखकर बसपा में शामिल हो गए।

सरधना सीट पर बदला सियासी समीकरण

सरधना सीट पर जातिगत समीकरण निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यहां मुस्लिम मतदाता करीब एक लाख, ठाकुर लगभग 60 हजार, जाट 50 हजार, गुर्जर 40 हजार और दलित 45 से 50 हजार हैं। संगीत सोम ने 2012 और 2017 में जाट-राजपूत और अन्य हिंदू जातियों के समर्थन से जीत हासिल की थी। 2022 में सपा-रालोद गठबंधन के कारण जाट वोट अतुल प्रधान के पक्ष में चले गए और उन्होंने संगीत सोम को हराया। अब रालोद भाजपा के साथ है, इसलिए संगीत सोम को जाट वोट मिलने की उम्मीद थी। लेकिन बसपा द्वारा जाट प्रत्याशी उतारने से उनका गणित बिगड़ सकता है।

गुर्जर समुदाय से आते हैं अतुल प्रधान

अतुल प्रधान गुर्जर समुदाय से आते हैं और क्षेत्र में प्रभावशाली हैं। बसपा दलित, मुस्लिम और जाट गठजोड़ की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। पहले भी बसपा इस सीट पर जीत हासिल कर चुकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विनीत भराला की मजबूत स्थानीय पकड़ जाट मतदाताओं को आकर्षित कर सकती है। इससे संगीत सोम और अतुल प्रधान दोनों के वोट बैंक प्रभावित हो सकते हैं।

क्या संगीत सोम की बढ़ेगी मुश्किल

संगीत सोम की राह में एक और चुनौती भाजपा के अंदरूनी समीकरण भी हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में हार के बाद संजीव बालियान से जुड़े विवादों ने जाट-ठाकुर सियासत को गर्मा दिया था। जाट समुदाय का एक हिस्सा संगीत सोम से नाराज माना जा रहा है। ठाकुर बहुल ‘ठाकुर चौबीसी’ क्षेत्र परिणाम प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाता है, लेकिन जाट वोट के बिना जीत आसान नहीं।

संगीत सोम, अतुल प्रधान और बसपा के बीच दिलचस्प हुआ मुकाबला

इस तरह सरधना में तीनों प्रमुख दावेदारों—भाजपा के संगीत सोम, सपा के अतुल प्रधान और बसपा के विनीत भराला—के बीच कड़ी टक्कर होने के आसार हैं। जाट वोट किसके पाले में जाता है, दलित-मुस्लिम समीकरण कितना मजबूती से काम करता है और स्थानीय मुद्दे कितना असर डालते हैं, इन्हीं पर सीट का भविष्य निर्भर करेगा। क्षेत्र के मतदाता अब इन समीकरणों को ध्यान से देख रहे हैं।

Updated on:
20 Aug 2026 04:50 pm
Published on:
20 Aug 2026 04:50 pm