मेरठ

यूपी के इस जिले में सट्टा किंग के खिलाफ आवाज उठाने का मतलब है मौत , पूरा मामला है यह

मेरठ के कई इलाके सट्टेबाजों के जाल में फंसे हुए है। प्रतिदिन सट्टेबाजी में फंसकर सैकड़ों युवक बर्बाद हो रहे हैं। ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी थाना पुलिस या आलाधिकारियों को न हो,
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Updated: 9 Jun 2018, 6:40 PM IST
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यूपी के इस शहर में सट्टेबाजी के खिलाफ आवाज उठाने का मतलब है बेहद खौफनाक, पूरा मामला है यह

मेरठ। जिस भाजपा सरकार में अपराध और अवैध धंधे रोकने के बड़े दावे किए जाते थे। आज उसी भाजपा की सरकार में खाकी की सरपरस्ती में अवैध धंधों का कारोबार फल-फूल रहा है। वह चाहे अवैध शराब बेचने का हो, गौवंश कटान का हो या फिर सट्टेबाजी का। मेरठ के कई इलाके सट्टेबाजों के जाल में फंसे हुए है। प्रतिदिन सट्टेबाजी में फंसकर सैकड़ों युवक बर्बाद हो रहे हैं। ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी थाना पुलिस या आलाधिकारियों को न हो, लेकिन इसके बाद भी वे कुछ नहीं करते। ये सट्टेबाज भी कानून को जेब में रखकर खुलकर सट्टे का कारोबार कर रहे हैं और प्रतिदिन लाखों रूपये के वारे-न्यारे कर रहे हैं।

सट्टेबाजी के साथ कबूतरबाजी

मेरठ थाना रेलवे रोड सिटी स्टेशन के पास सट्टे व कबूतर बाजी सट्टे का काला कारोबार खुलेआम हो रहा है। 'पत्रिका' के पास एेसी ही सट्टेबाजी का वीडियो है, शहर में सट्टेबाजी की पोल खोल रहा है। इसमें दिखाया जा रहा है कि सट्टेबाज कैसे सट्टा लगवा रहा है। यह सट्टेबाज कानून की धज्जियां उड़ा रहा है। ऐसा नहीं है कि रेलवे रोड पुलिस को इस सट्टे के काले करोबार के बारे में नहीं हो, लेकिन पता होने के बाद भी वह कुछ नहीं कर रही है। आलाधिकारियों ने कई बार इस पर अंकुश लगाने की बात कही। लेकिन हर बार कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति होती है।

आवाज उठाने वालों को मिलती है धमकी

आसपड़ोस का जो भी व्यक्ति इस सट्टे को बंद कराने की आवाज उठाता है, उसको जान से मारने की धमकी मिलनी शुरू हो जाती है। सट्टा संचालकों के सूत्र इतने मजबूत हैं कि उसको थाना स्तर से ही पता चल जाता है कि किसने उसके खिलाफ थाने में शिकायत की है। वीरपाल नामक शख्स ने एक बार इस सट्टा संचालक के खिलाफ आवाज उठाई और इसकी शिकायत एसएसपी कार्यालय तक की, लेकिन इसके बदले उसे जान से मारने की धमकी मिल गई। उल्टा सट्टा तो बंद नहीं हुआ वह अपनी जान बचाता हुआ घूम रहा है।

कई बार बिगड़ चुके हैं हालात

सट्टे में विवाद को लेकर कई बार यहां पर हालात बिगड़ चुके हैं। लड़ाई और मारपीट तो यहां पर आम बात है। जिसका न तो थाना पुलिस पर असर होता है और न ही सट्टेबाज पर। मारपीट की घटना के बाद पुलिस आती है और पीड़ित को अपने साथ ले जाकर छोड़ देती है। सट्टा फिर भी निर्बाध गति से अपनी रफ्तार से चलता रहता है। सट्टा की यह दुकान सुबह सात बजे ही खुल जाती है और देर रात तक गुलजार रहती है।

बोले अधिकारी

सट्टे को बंद कराने के बारे में जब एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह से बात की गई तो उनका कहना था कि इसकी जांच करवाई जाएगी और शहर में चल रहे इस प्रकार के सभी सट्टों को एक सप्ताह के भीतर बंद कराया जाएगा।

Updated on:
9 Jun 2018, 6:40 PM IST
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