Highlights - सेव इंडिया फाउंडेशन ने 25 नवंबर से 12 दिसंबर तक दिल्ली में चलाया अभियान - जनसंख्या नियंत्रण कानून एक बार फिर चर्चा में- देशभर के 211 सांसदों के घर जाकर सौंपा ज्ञापन
मेरठ. जनसंख्या नियंत्रण कानून एक बार फिर चर्चा में है। पिछले कई महीनों से जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग को लेकर सेव इंडिया फाउंडेशन के राजेश शर्मा और पथिक सेना के संयोजक मुखिया गुर्जर ने विगत 25 नवंबर से 12 दिसंबर तक दिल्ली में डेरा डाल रखा था। इस दौरान संसद सत्र में भाग लेने वाले सांसदों के आवास पर जाकर उनकों ज्ञापन सौंपा और जनसंख्या नियंत्रण कानून की आवाज उठाने के लिए समर्थन प्राप्त किया। राजेश शर्मा ने बताया कि उन्होंने कुल 211 सांसदों से मुलाकात कर उनका समर्थन प्राप्त किया है।
राजेश शर्मा ने बताया कि उन्होंने सांसदों को वही तर्क दिया है, जो आमतौर पर बढ़ती आबादी पर रोक लगाने के लिए दिया जाता है, लेकिन अधिक बच्चे पैदा करने वालों को हतोत्साहित करने के लिए उन्होंने जो उपाय सुझाए हैं उनसे हलचल सी मच गयी है। तीसरे बच्चे को सरकारी सहायता, मतदान और चुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित करने की वकालत करके उन्होंने इस बहस में नयी जान फूंक दी है। वैसे जनसंख्या नियंत्रण के इस अभियान में राजेश शर्मा अकेले नहीं हैं। गांव, गरीब, गांधी के बैनर तले वे पद यात्राएं कर जनसंख्या नियंत्रण कानून के पक्ष में जनमत तैयार करने में लगे हैं। पिछले साल उन्होंने प्रधानमंत्री आवास तक की पैदल यात्रा की और उनको इस संबंध में एक ज्ञापन भी दिया था।
उन्होंने बताया कि जनसंख्या नियंत्रण को लेकर संसद में भी आवाज उठी है। पिछली लोकसभा में कुछ सांसदों ने प्राइवेट मेंबर बिल पेश कर इस पर ध्यान आकृष्ट किया। कई बार सर्वोच्च न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाया गया है, लेकिन कानून बनाना विधायिका का काम है। इसलिए उन याचिकाओं को खारिज कर दिया गया। फिर भी हाल के दिनों में कई जनहित याचिकाएं दायर की गयी हैं, जिनमें से एक पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने सरकार से जवाब भी मांगा है। इन याचिकाओं में कहा गया है कि जनसंख्या विस्फोट को रोकना आवश्यक है, क्योंकि देश में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन सीमित है।
राजेश शर्मा ने बताया कि अगर इस पर लगाम नहीं लगायी गयी, तो आने वाले दिनों में सबको मूलभूत सुविधाएं भी नहीं दी जा सकेंगी, खासकर पानी। राजेश शर्मा ने बताया कि स्वतंत्रता के समय भारत की आबादी 33 करोड़ थी, जो 1 अरब 35 करोड़ के आसपास हो गयी है। उन्होंने बताया कि ईस्ट एशिया फोरम की रिपोर्ट के अनुसार, 2050 तक यह 1 अरब 69 करोड़ हो जाएगी। मतलब भारत दुनिया का सबसे बड़ी आबादी वाला देश हो जाएगा। तब भोजन-पानी की मांग तो बढ़ेगी ही सबके लिए स्कूल, अस्पताल, सड़कें और रोजगार उपलब्ध कराना असंभव हो जाएगा। हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव के दौरान रोजगार को लेकर जिस तरह से केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की गयी, वह सबके सामने है। आश्चर्य की बात यह है कि किसी भी दल ने बेरोजगारी के लिए जनसंख्या विस्फोट की बात नहीं की। उससे भी खराब बात यह थी कि कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने पकौड़े तलने के व्यवसाय का मजाक उड़ाया।