
truth of beheaded corpse प्रेमिका शाहिना के लापता होने पर उसका प्रेमी वसीम उसे तलाश रहा था। लेकिन कहीं भी शाहिना का पता नहीं चल रहा था। वसीम ने पुलिस को जो जानकारी दी है उसके मुताबिक शाहिना अक्सर रात में काफी देर तक उससे बात करती रहती थी। गत गुरुवार को भी रात शाहिना ने करीब एक बजे तक वसीम से बातचीत की थी। उसके बाद ढाई बजे शाहिना की हत्या कर दी गई। गुरुवार रात के बाद प्रेमी वसीम की बातचीत सानिया कुरैशी से नहीं हो पाई। वसीम ने शुक्रवार से रविवार तक शाहिना के मोबाइल काल का इंतजार किया। उसके बाद कोई पता नहीं चलने पर वसीम ने शाहिना की तलाश शुरू कर दी।
वसीम को लग रहा था कि शाहिना के साथ कोई घटना ना हो गई हो। इसक बाद उसने सदर बाजार थाने में तैनात सिपाही शुभम यादव को शाहिना के बारे में जानकारी दी। इसके बाद सिपाही शुभम यादव ने एसपी क्राइम और सीओ कोतवाली को इस बारे में फोन कर पूरी बात बताई। उसके बाद पुलिस शाहिद के घर पहुंची। शाहिद को उठाकर थाने लाकर बेटी शाहिना के बारे में पूछताछ की। शाहिद कुछ देर की पूछताछ में टूट गया। उसने कबूल किया कि बेटी शाहिना की हत्या उसने की है। उसके परिवार के अन्य सदस्यों का इस हत्याकांड से कोई मतलब नहीं है। बाद में एसएसपी SSP ने सिपाही शुभम यादव को पुरस्कृत किया।
हैरानी की बात है कि छह दिनों तक लिसाड़ीगेट पुलिस और क्राइम ब्रांच युवती की पहचान और हत्यारोपियों की धरपकड़ का कोई एक सबूत तक नहीं तलाश कर पाए। शाहिद कुरैशी ने पहले जमात की। उसके बाद उसने बेटी की हत्या कर घर से बाहर ही निकलना बंद कर दिया। आसपास के पड़ोसियों से संपर्क बंद कर दिया था। तीन माह में परिवार को आसपास के लोग पूरी तरह से नहीं जान नहीं पाए।