मेरठ

Shardiya Navratri 2019: मंशा देवी के सामने श्रद्धालु लिखते हैं मनोकामना, जिन्हें पूरा करती हैं मां

Highlights मरघट वाली इस माता के दर से कोई खाली नहीं जाता 200 साल पुराने मंदिर के चारों ओर था जंगल और बाग नवरात्रि में मां के नौ रूपों के दर्शन करने आते हैं श्रद्धालु

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Oct 07, 2019

मेरठ। मां मंशा देवी का मंदिर करीब 200 साल पुराना है। इस मंदिर को मरघट वाली माता का मंदिर भी कहा जाता है। कभी इस मंदिर के चारों ओर बाग और जंगल हुआ करता था। मंदिर के पास ही श्मशान घाट हुआ करता था। कहा जाता है जो भी इस मरघट वाली माता के मंदिर में आता था और श्रद्धा से कुछ मांगता था वह खाली नहीं लौटता था। उसकी हर मुराद पूरी होती थी।

मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां से मां किसी को भी खाली हाथ नहीं लौटाने देती हैं। यहां पहले जंगल हुआ करता था। जंगल के पास ही ओरंग सहापुर डिग्गी की शमशान भूमि हुआ करती थी। जिसके बीच में देवी की मूर्ति रखी हुई थी। मूर्ति कहां से आई और किसने स्थापित की यह आज भी रहस्य बना हुआ है। इसलिए इसे मरघट वाली मां का मंदिर भी कहते हैं।

मंदिर की खासियत है कि यहां भक्तों को व्रत के नौ दिन मां के नौ रूपों के दर्शन कराए जाते हैं। बुधवार को मां हरे रंग का चोला, गुरुवार को पीला, शुक्र को जामुनी, शनिवार को नीला या काला, रविवार को लाल रंग और सोमवार को सफेद और मंगलवार को मां को नारंगी रंग का चोला पहनाया जाता है। मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां कोई भी भक्त कभी खाली नहीं जाता है। मंदिर के बारे में लोगों की ऐसी भी मान्यता है कि यहां अपनी मुरादें लिखने से मां उनकी मुरादें सुनती हैं। इसलिए लोग यहां दीवारों पर अपनी मुरादें भी लिखते हैं।

नवरात्र के नौ दिनों में सुबह मां का श्रृंगार किया जाता है और हवन किया जाता है। रात्रि में भी विशेष पूजा अर्चना व दर्शन होते हैं। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुगण बताते हैं कि मां की महिमा निराली है वे अपने भक्तों की सभी मुरादें पूरी करती है।

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Updated on:
06 Oct 2019 10:18 pm
Published on:
07 Oct 2019 04:30 am
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