खास बातें सिद्धपीठ श्री औघड़नाथ मंदिर में पूजा अर्चना के लिए दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु ब्रिटिश हुकूमत में काली पल्टन के सिपाही इस मंदिर में पूजा करने आते थे
मेरठ। मेरठ कैंट स्थित श्री औघड़नाथ मंदिर वेस्ट यूपी का वह सिद्धपीठ है, जहां भगवान शिव के दर्शन और पूजा करने दूर-दूर से लोग आते हैं। श्री औघड़नाथ मंदिर खुद देश का इतिहास सहेजे हुए है। देश का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम यहीं से शुरू हुआ था। दरअसल, ब्रिटिश हुकूमत में भारतीय सैनिक (काली पल्टन) यहां मौजूद शिवलिंग की पूजा करने आते थे। इस शिवलिंग का रखरखाव करने वाले पुजारी ने भारतीय सैनिकों को यहां के कुएं का पानी पिलाने से मना किया था, क्योंकि भारतीय सैनिक चर्बीयुक्त कारतूस का बंदूकों में इस्तेमाल किया करते थे। इसी बात को लेकर भारतीय सैनिकों में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की ज्वाला भड़की थी। इसके बाद मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ और यह काली पल्टन मंदिर अब श्री औघड़नाथ मंदिर से जाना जाता है।
ऐसे होती है हर मनोकामना पूरी
श्री औघड़नाथ मंदिर के पुजारी श्री सारंग धर त्रिपाठी का कहना है कि यहां का शिवलिंग स्वयंभू है। इस सिद्धपीठ में पूजा करने से सबकी मनोकामना पूरी होती है। भगवान शिव को यहां एक लौटा जल, बेलपत्र, फूल चढ़ाने से उनका आशीर्वाद मिलता है। उन्होंने बताया कि औघड़नाथ मंदिर में अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवानी, सुषमा स्वराज, मुलायम सिंह यादव, माायवती, सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के जज समेत कई वीवीआईपी पूजा कर चुके हैं।इन्हें यहां भगवान शिव का आशीर्वाद मिला और उनकी मनोकामना पूर्ण हुई। वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश धींगरा ने बताया कि वह 1980 से इस मंदिर में आ रहे हैं और बाबा ने उनकी हर कामना पूरी की है। समाजसेवी जगमोहन शाकाल का कहना है कि श्री औघड़नाथ मंदिर सिद्धपीठ तो है ही, साथ ही देश के इतिहास में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। 1857 की क्रांति यहीं से शुरू हुई थी। श्रद्धालुओं को यहां पूजा और जलाभिषेक करने पर भगवान शिव का आशीर्वाद जरूर मिलता है।