Teachers Day 2018 : पीवीवीएनएल के प्रबंध निदेशक आर्इएएस आशुतोष निरंजन जी कहते हैं कि उनको मैडम ने आगे बैठने की हिदायत दी और उसके बाद से आशुतोश जी ने आगे बैठना शुरू किया फिर उनके जैसा अंग्रेजी बोलने वाला क्लास में कोई नहीं था।
मेरठ। आदर्श शिक्षक का आंकलन उनके चारित्रिक और शैक्षणिक क्षमता के आधार पर किया जाता है। आदर्श शिक्षक वह है जो अपने चरित्र की शुद्धता को कायम रखते हुए अपने शैक्षिक दायित्वों का निर्वहन भलीभांति करता है। आदर्श शिक्षक किसी भी समाज व राष्ट्र की अनमोल संपत्ति होता है। Teachers Day पर यह कहना है पीवीवीएनएल के प्रबंध निदेशक आर्इएएस आशुतोष निरंजन का।
शिक्षकों की बदौलत हैं आज
पीवीवीएनएएल के एमडी आशुतोष निरंजन कहते हैं आज वह जो भी हैं अपने शिक्षकाें की बदौलत है। पुरानी यादों में खोते हुए आशुतोष अपनी अंग्रेजी की मैडम को याद करते हुए कहते हैं कि उनकी अंग्रेजी की मैडम में पढ़ाने का जज्बा बड़ा गजब का था। आशुतोष निरंजन लखनऊ के सीएमएस में पढ़े। बताते हैं बात उस दौर की है जब वह कक्षा आठ में थे। वह कक्षा में सबसे पीछे बैठा करते थे। अंग्रेजी की मैडम का नाम तो उन्हें याद नहीं, लेेकिन वह जब पढ़ाने आया करती थी तो पढ़ाते समय भूल जाती थी कि पीरियड खत्म हो गया है। आर्इएएस आशुतोष निरंजन जी याद करते हुए कहते हैं कि उनको मैडम ने आगे बैठने की हिदायत दी और उसके बाद से आशुतोश जी ने आगे बैठना शुरू किया फिर उनके जैसा अंग्रेजी बोलने वाला क्लास में कोई नहीं था। वह आज भी अपनी उन मैम को याद करते हैं। जिन्होंने आशुतोष निरंजन को अंग्रेजी में निपुण कर दिया। पुरानी यादों को याद करते हैं और बताते हैं कि उस दौर के शिक्षक समाज में व्याप्त भाषागत एवं अशिक्षामयी अंधेरा को दूर करने के लिए प्रयत्नशील रहते थे।
अपने आदर्शों पर कायम रहते थे
वे सर्वप्रथम स्वयं उच्च शिक्षाधारी और योग्यताओं से भरा होने के साथ ही अपने सिद्धान्तों पर कायम रहते थे। दूसरों के लिए मिसाल कायम करते थे। वह मैम छात्रों के बीच अत्यन्त लोकप्रिय थी। वह बच्चों को पढ़ाते समय अत्यन्त स्नेह दिखाती थी। जरूरत पड़ने पर वे इतनी गुस्सा हो जाती थी कि उनका सामना करना भी मुश्किल हो जाता था। अंग्रेजी विषय पर उनकी अत्यन्त पकड़ थी। बच्चे भी बड़े रुचि से उनकी कक्षा में सम्मिलित होते थे और पढ़ाई करते थे। वह बच्चाें से अतिरिक्त गतिविधियों में भी उनकी चंचलता देखती थी। आदर्श शिक्षक थी और समाज में व्याप्त अशिक्षारूपी अंधेरे को दूर करने हेतु वह आज भी एक मिसाल सदृश हैं। आज वह कहां है मुझे नहीं पता लेकिन मैं आज भी उनका बहुत सम्मान करता हूं।